उमर अब्दुल्ला आखिर मोदी सरकार की तरफ दोस्ती का हाथ क्यों बढ़ा रहे?, जानिए नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख के सामने कैसी हैं चुनौतियां
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार बनने जा रही है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में 42 सीट हासिल की। नेशनल कॉन्फ्रेंस की सहयोगी कांग्रेस को 6 सीट पर जीत मिली। वहीं, 4 निर्दलीय विधायकों ने भी नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है। आम आदमी पार्टी का भी 1 विधायक नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार को समर्थन देगा। इस तरह नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के पक्ष में 53 विधायक हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सदस्य संख्या 90 है। इसके अलावा 5 मनोनीत विधायक भी होंगे। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 48 सीट का है और इसी वजह से उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के सिर हमेशा तलवार लटकती रहेगी।
अगर 6 विधायक भी कभी समर्थन वापस लें और अन्य दलों से कम से कम इतने विधायक उमर अब्दुल्ला न जुटा सके, तो उनकी सरकार का उसी वक्त पतन हो जाएगा। अगर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बाकी दलों की हालत देखें, तो बीजेपी के 29 विधायक हैं। पीडीपी के 3, सीपीएम का 1, जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का 1, आम आदमी पार्टी का 1 और निर्दलीय विधायक 7 हैं। ऐसे में केंद्र या जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा से टकराव लेना नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार के लिए बहुत माकूल नहीं रहने वाला है। शायद यही वजह है कि उमर अब्दुल्ला केंद्र और लेफ्टिनेंट गवर्नर से सहयोग बनाए रखने की बात कहते भी नजर आए हैं।
उमर अब्दुल्ला ने शायद ये भी समझ लिया है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार से टकराव का रास्ता अपनाकर नुकसान के सिवाय कुछ हासिल नहीं किया। इसकी बानगी उमर अब्दुल्ला के बयानों में भी दिखती रही है। चुनाव प्रचार और फिर बड़ी जीत हासिल करने के बाद उमर अब्दुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की नीति के बारे में ऐसे ही संकेत भी दिए हैं। उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी सम्माननीय हैं।
मोदी ने जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रचार करते वक्त राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया और सम्माननीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी यही बात कही। उमर अब्दुल्ला ने ये भी कहा कि वो सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार लेफ्टिनेंट गवर्नर और केंद्र के साथ अच्छे संबंध रखे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना नई सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए उनकी सरकार केंद्र के साथ काम करेगी। उमर अब्दुल्ला ने ये भी कहा कि हमें केंद्र सरकार से समन्वय बनाकर चलने की जरूरत है। नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के सीएम बनने जा रहे उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दों का समाधान केंद्र सरकार से लड़ाई करके नहीं होगा।
