समझौते के बाद पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन के बीच डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया शुरू, सैनिकों की वापसी का दौर जारी
नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया शुरू हो गई है। देपसांग और डेमचॉक इलाकों से दोनों देशों के सैनिक पीछे हटने लगे हैं। समझौते के अनुसार, दोनों पक्षों ने एक-एक तंबू और कुछ टेम्परेरी स्ट्रक्चर ध्वस्त कर दिए हैं। डेमचॉक क्षेत्र में भारतीय सैनिक चार्डिंग नाले के पश्चिम में पीछे की ओर जा रहे हैं, जबकि चीनी सैनिक नाले के पूर्वी हिस्से की ओर लौट रहे हैं।
स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकें जारी
सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों ने देपसांग और डेमचॉक इलाकों में करीब 10-12 अस्थाई स्ट्रक्चर और 12-12 टेंट बनाए थे, जिन्हें अब हटाने की प्रक्रिया जारी है। देपसांग में चीनी सैनिकों के टेंट नहीं हैं, लेकिन उन्होंने गाड़ियों के बीच में तिरपाल लगाकर अस्थाई शेल्टर तैयार किए हैं। इन इलाकों में डिसइंगेजमेंट के बाद अगले चार-पांच दिनों में पेट्रोलिंग शुरू होने की उम्मीद है। स्थानीय कमांडर स्तर की बातचीत मंगलवार से शुरू हुई। बुधवार को डेमचॉक में दोनों तरफ से एक-एक टेंट हटाया गया, और गुरुवार को कुछ अस्थाई स्ट्रक्चर भी ध्वस्त किए गए। गुरुवार को चीनी सैनिकों ने यहां से अपनी कुछ गाड़ियाँ हटा लीं और भारतीय सेना ने भी अपनी संख्या में कमी की।
लद्दाख में चार वर्षों से चल रहा था गतिरोध
गत 21 अक्टूबर को हुए समझौते के बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख में गश्त के लिए चीन के साथ सहमति जताई थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस समझौते को बड़ी उपलब्धि करार देते हुए कहा कि दोनों देशों के सैनिक अब उसी तरह गश्त कर सकेंगे, जैसे 2020 से पहले किया करते थे। जून 2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ था।
