September 27, 2026

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ब्रिक्स प्लस सम्मेलन में एस. जयशंकर ने उठाया युद्ध और आतंकवाद का मुद्दा, शांति का किया आह्वान

नई दिल्ली। रूस के कज़ान में ब्रिक्स प्लस सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया है कि यह युद्ध का युग नहीं है। विवादों और मतभेदों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए। एक बार जब समझौते हो जाते हैं, तो उनका ईमानदारी से सम्मान किया जाना चाहिए।

अंतर्राष्ट्रीय कानून का बिना किसी अपवाद के पालन किया जाना चाहिए और आतंकवाद के लिए शून्य सहिष्णुता होनी चाहिए। मध्य पूर्व-पश्चिम एशिया की स्थिति हमारे लिए एक समझने योग्य चिंता है। हमें इस बात की चिंता है कि इस क्षेत्र में संघर्ष और फैल जाएगा। इससे समुद्री व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आगे बढ़ने के मानवीय और भौतिक परिणाम वास्तव में गंभीर हैं। कोई भी दृष्टिकोण निष्पक्ष और टिकाऊ होना चाहिए, जिससे ‘टू स्टेट सॉल्यूशन’ हो।

भारत के विदेश मंत्री ने कहा, ब्रिक्स स्वयं इस बात को कहता है कि पुरानी (विश्व) व्यवस्था कितनी गहराई से बदल रही है। साथ ही, अतीत की कई असमानताएँ भी जारी हैं। वस्तुतः, उन्होंने नये-नये रूप और अभिव्यक्तियाँ ग्रहण कर ली हैं। हम इसे विकासात्मक संसाधनों तक पहुंच और आधुनिक प्रौद्योगिकियों और दक्षताओं तक पहुंच में देखते हैं।

जयशंकर ने कहा, कि हम अधिक न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था कैसे बना सकते हैं? इसके लिए उन्होंने पांच तरीके भी बताए-

1) सबसे पहले स्वतंत्र प्रकृति के प्लेटफ़ॉर्म को मज़बूत और विस्तारित करके। विभिन्न डोमेन में विकल्पों को व्यापक बनाकर और उन पर अनावश्यक निर्भरता को कम करके जिनका लाभ उठाया जा सकता है। इसमें ब्रिक्स ग्लोबल साउथ के लिए एक अंतर बना सकता है।

2) स्थापित संस्थानों और तंत्रों में सुधार करके, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी और गैर-स्थायी श्रेणियों में सुधार करके। इसी तरह बहुपक्षीय विकास बैंक मे सुधार करके, जिनकी कार्य प्रक्रियाएँ संयुक्त राष्ट्र की तरह ही पुरानी हैं। भारत ने अपने जी20 प्रेसीडेंसी के दौरान एक प्रयास शुरू किया और हमें यह देखकर खुशी हुई कि ब्राज़ील ने इसे आगे बढ़ाया।

3) अधिक उत्पादन केंद्र बनाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था का लोकतंत्रीकरण करके।

4) वैश्विक बुनियादी ढाँचे में विकृतियों को ठीक करके जो औपनिवेशिक युग से विरासत में मिली हैं। दुनिया को अधिक कनेक्टिविटी विकल्पों की आवश्यकता है जो रसद को बढ़ाएँ और जोखिमों को कम करें। यह एक सामूहिक प्रयास होना चाहिए, जिसमें क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का पूरा सम्मान हो।

5) अनुभवों और नई पहलों को साझा करके।