जहां चाहें ट्रांसफर करा लें, लेकिन पढ़ाना तो पड़ेगा’, बिहार के सीएम सम्राट चौधरी की सरकारी टीचरों को चेतावनी
कैमूर। बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने राज्य के सरकारी स्कूल टीचरों को साफ-साफ चेतावनी देते हुए कहा है कि उनको पढ़ाना पड़ेगा। सम्राट चौधरी ने बिहार के कैमूर जिले में सहयोग शिविर कार्यक्रम में कहा कि टीचरों की सुविधाओं का सरकार पूरा ध्यान रख रही है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता और पढ़ाई से कोई समझौता नहीं होगा। सीएम सम्राट चौधरी ने सरकारी स्कूलों के टीचरों के लिए ये तक कहा कि जहां ट्रांसफर कराना है, करा लीजिए, लेकिन पढ़ाना पड़ेगा और बहाना नहीं चलेगा।
सम्राट चौधरी सरकार ने इससे पहले नियम लागू किया था कि स्कूलों में पढ़ाई के वक्त कोई कोचिंग नहीं चल सकेगी। सरकारी स्कूलों के टीचरों के कोचिंग या ट्यूशन पढ़ाने पर भी रोक लगाई जा चुकी है। बीजेपी-जेडीयू सरकार ने तय किया है कि बिहार के सरकारी स्कूलों में हालात को बदला जाए। इससे पहले नीतीश कुमार के बिहार का सीएम रहते शिक्षा विभाग देखने वाले एडिशनल चीफ सेक्रेटरी केके पाठक ने सरकारी स्कूलों की दशा-दिशा सुधारने और टीचरों की हाजिरी को सुनिश्चित करने के लिए तमाम कदम उठाए थे। हालांकि, उनकी सख्ती की आलोचना भी हुई थी। इसके बाद उनको शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी से हटाया गया था।
जेडीयू और बीजेपी की एनडीए सरकार के दौर में बिहार के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। सरकारी स्कूलों के 80 से 85 फीसदी छात्र बिहार बोर्ड की परीक्षा पास करते रहते हैं। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने तय किया है कि वो सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूलों मे बदलने का काम करेगा। ताकि वहां शिक्षा के स्तर को और सुधारा जा सके। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बिहार के सरकारी स्कूलों में 1.71 करोड़ छात्र पढ़ते हैं। शिक्षा विभाग के मुताबिक कुल स्कूली नामांकन का 81 से 83 फीसदी हिस्सा सरकारी स्कूलों में ही होता है। यानी बिहार के ज्यादातर लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजते हैं। अगर सम्राट चौधरी सरकार सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बेहतर करा लेती है, तो इससे राज्य के बच्चों का काफी भला होगा।
