नक्सली विचारधारा के ताबूत में ठुकी अंतिम कील, माओवादी पोलित ब्यूरो का एकमात्र बचा सदस्य मिसिर बेसरा गिरफ्तार
धनबाद। नक्सलियों के शीर्ष नेताओं में शामिल और संगठन के पोलित ब्यूरो के एकमात्र बचे सदस्य मिसिर बेसरा को मंगलवार शाम दो अन्य साथियों के साथ झारखंड के धनबाद जिले में गिरफ्तार कर लिया गया। मिसिर बेसरा पर झारखंड में 1 करोड़ और ओडिशा में 1.20 करोड़ का इनाम है। मिसिर बेसरा पर झारखंड और ओडिशा में दर्जनों केस हैं। मिसिर बेसरा झारखंड के गिरिडीह जिले के हरलाडीह का निवासी था। उसे धनबाद के बरवाअड्डा थाना इलाके के मनियाडीह में एक गाड़ी से पकड़ा गया। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से नक्सली विचारधारा के ताबूत में अंतिम कील ठुक गई है।
मिसिर बेसरा को सागर और भास्कर के नाम से भी पहचाना जाता है। मिसिर बेसरा की उम्र 66 साल है। साल 2007 में झारखंड में नक्सलियों के टॉप नेताओं में शामिल मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन साल 2009 में नक्सलियों ने लखीसराय कोर्ट परिसर पर हमला कर अपने इस टॉप नेता को छुड़ा लिया। उसके बाद से ही पुलिस और सीआरपीएफ लगातार मिसिर बेसरा की तलाश में थे। उसके अलावा कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के महासचिव गणपति की भी तलाश की जा रही थी। गणपति के बारे में माना जाता है कि या तो वो नेपाल भाग गया है या उसकी मौत हो चुकी है।
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से पहले मंगलवार को ही झारखंड पुलिस के सामने 16 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में से 6 पर 39 लाख का इनाम घोषित किया गया था। इनमें संतोष महतो उर्फ वासुदेव दा उर्फ दिलीप भी शामिल है। संतोष 128 मामलों में वांछित था। उस पर 15 लाख का इनाम था। जबकि, सरेंडर करने वालों में शामिल चंदन लोहरा पर 10 लाख और नक्सली अनिल तुरी उर्फ उज्ज्वल, सुखलाल बिरंजिया पर 5-5 लाख के साथ ही सुदेश होनहागा और रिसिव सोय पर 2-2 लाख का इनाम घोषित था। सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने 2 एके-47 रायफल, 6 इंसास रायफल, अमेरिका में बनी कार्बाइन समेत 11 हथियार सौंपे।
