March 3, 2026

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QUAD मीटिंग से China को संदेश, PM मोदी ने उठाया चीनी APP का मुद्दा तो बौखलाया ड्रैगन

नई दिल्ली। चीन को जिस QUAD संगठन से हमेशा से मिर्ची लगती रही है उसका अमेरिका की धरती पर सफल आयोजन हो गया। इस मीटिंग में भारत, अमेरिका, जापान समेत ऑस्ट्रेलिया ने लगातार कई मुद्दों पर मंथन किया। मीटिंग के दौरान कोरोना के मसले पर भी बातचीत हुई साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र की संवेदनशीलता पर भी विचार रखे गए। एक ओर जहां मीटिंग में शामिल हुए देशों के प्रमुखों ने QUAD की अहमियत समझाई तो वहीं पीएम मोदी ने अफगानिस्तान और चीन को कड़ा संदेश दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बैठक के शुरुआती बयान में ही साफ कर दिया कि दुनिया के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं, जिनका QUAD मिलकर सामना कर सकता है। बाइडेन ने पीएम मॉरिसन, पीएम मोदी और पीएम सुगा का व्हाइट हाउस में स्वागत किया और कहा कि इस संगठन में सिर्फ वहीं लोकतांत्रिक देश रखे गए हैं जो पूरी दुनिया के लिए समावेशी सोच रखते हैं। संगठन में शामिल देशों का भविष्य के लिए एक विजन है। हम सभी मिलकर सामने आनी वाली चुनौतियों से निपटने की तैयारी करेंगे।

जो बाइडेन के शुरुआती बयान बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने भी QUAD की बैठक में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि हमें खुशी होगी अगर क्वाड देश सप्लाई चेन, क्लाइमेट एक्शन और कोविड रिस्पॉन्स जैसे मामलों में साथ आ पाए। इसके आलावा QUAD देशों ने अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा कर तालिबान को कड़ा संदेश देने का प्रयास किया। इस दौरान पीएम मोदी ने QUAD से चीनी ऐप्स को लेकर अपना कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने ‘CLEAN APP MOVEMENT’ को धार देने पर जोर दिया जिसपर उन्हें QUAD के दूसरे देशों का भी साथ मिला। बता दें, भारत ने कई चीनी ऐप्स पर बैन लगा रखा है। ऐप्स को राष्ट्रीय सुरक्षा और किसी को निजता का हनन करने की वजह से बैन किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी के बाद ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन ने भी अपने मन की बात रखी। मॉरिसन ने कहा कि हम एक स्वतंत्र और मजबूत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विश्वास रखते हैं। इसी से इस क्षेत्र का संपूर्ण विकास संभव है। मॉरिसन के बाद QUAD बैठक में अपने विचार रखते हुए जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा कि तमाम देश स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करते हैं। सुगो ने इस बात का भी जिक्र किया कि पहले अमेरिका द्वारा जापानी खाद्य उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन अप्रैल महीने में उसे वापस ले लिया गया। अमेरिका के इस फैसले से जापान को आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिली है।

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