‘जो नियम एक के लिए…’, तिरुपति मंदिर में सिर्फ हिंदू कर्मचारी रखने के फैसले पर असदुद्दीन ओवैसी ने साधा निशाना
हैदराबाद। भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में अब हिंदू कर्मचारी काम करेंगे। ये बयान तिरुमला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड (टीटीडी) के नए अध्यक्ष बीआर नायडू ने बीते दिनों दिया था। इस बयान पर अब राजनीति गर्मा रही है। तिरुपति मंदिर में हिंदू कर्मचारी होने के मुद्दे को उठाकर एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ बोर्ड का मसला फिर उछाला है। असदुद्दीन ओवैसी लगातार वक्फ कानून में बदलाव की मोदी सरकार की कोशिश पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद बीआर नायडू ने कहा था कि तिरुमला में काम करने वाला हर कर्मचारी हिंदू होना चाहिए। नायडू ने कहा था कि ऐसा करना उनकी पहली कोशिश होगी। बीआर नायडू ने कहा था कि वो टीटीडी बोर्ड में काम करने वाले अन्य धर्मों के कर्मचारियों के भविष्य के बारे में आंध्र प्रदेश की सरकार से चर्चा करेंगे। नायडू ने कहा था कि इस काम में कई मुद्दे हैं और उनपर विचार करना होगा। टीटीडी बोर्ड के नए अध्यक्ष ने ये भी कहा था कि गैर हिंदू कर्मचारियों को वीआरएस या उनको किसी अन्य जगह ट्रांसफर करने के बारे में भी सोचा जाएगा।
आंध्र प्रदेश सरकार ने बीते दिनों ही तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के नए बोर्ड का गठन किया है। इसमें 24 सदस्य हैं। तिरुमला तिरुपति दुनिया का सबसे ज्यादा अमीर मंदिर है। बीते दिनों ही आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने ये कहकर हंगामा खड़ा कर दिया था कि पूर्व की जगनमोहन रेड्डी की सरकार के दौरान भगवान वेंकटेश्वर को चढ़ाए जाने वाले लड्डू प्रसादम में जानवरों की चर्बी वाला घी इस्तेमाल किया गया। ये मुद्दा इतना गर्माया कि सुप्रीम कोर्ट तक में सुनवाई हुई। अब हिंदू कर्मचारियों को ही तिरुपति मंदिर में रखने के फैसले पर नया विवाद शुरू होने के पूरे आसार दिख रहे हैं।
