April 18, 2026

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पटपड़गंज का चुनावी संग्राम, क्यूं ओझा की जमानत जब्त होने के लगाए जा रहे हैं कयास?

रविन्द्र बंसल प्रदेश प्रभारी यूपी, यूके / हिंद फोकस न्यूज़              पटपड़गंज का चुनावी संग्राम: क्यूं ओझा की जमानत जब्त होने के लगाए जा रहे हैं कयास?
दिल्ली।पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र में इस बार का चुनावी समीकरण बेहद दिलचस्प है। भाजपा, आप, और कांग्रेस के बीच तगड़ा मुकाबला है, लेकिन सियासी पंडितों और स्थानीय जनता के बीच यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवार की जमानत जब्त हो सकती है।
भाजपा का समीकरण
भाजपा ने इस बार रवि नेगी को टिकट दिया है। भाजपा के इस निर्णय से पार्टी का पारंपरिक पूर्वांचली वोटर इस बार खफा नजर आ रहा है।
नाराजगी का कारण:
1. भाजपा के उम्मीदवार की नफरत फैलाने वाली छवि
2. बतौर पार्षद उनका प्रदर्शन क्षेत्रवासियों को संतोषजनक नहीं लगा
3. इलाके में ‘लेंटर मैन’ और रेहड़ी-पटरी वालों से उगाही के किस्से आम हैं।
रवि नेगी दवा कि उत्तराखंडी समुदाय का वोटों शत प्रतिशत उनके पक्ष में है, इसके अलावा भाजपा का बड़ा वोट बैंक है, जो हमेशा पार्टी के पक्ष में ही वोट करता है। रवि नेगी के समर्थकों का मानना है कि उन्हें मनीष सिसोदिया द्वारा 12 वर्षों तक विधानसभा क्षेत्र की अपेक्षा करने का लाभ भी मिल रहा है। क्योंकि क्षेत्रवासी अब बदलाव चाहते हैं। मनीष सिसोदिया द्वारा मैदान छोड़ने से आम आदमी का वोटर भी भाजपा की और आ गया है, जिससे उनकी जीत की डगर आसान हो गई है।
 आप के उम्मीदवार को चुनौती
आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार ओझा को क्षेत्र के लोग बालि का बकरा मान रहे हैं। लोगों को कहना है कि हार के डर से मनीष सिसोदिया मैदान छोड़कर भाग गए हैं। ओझा मरे मन से पार्टी हाई कमान के कहने पर पटपड़गंज से चुनाव लड़ने के लिए मजबूर है। लेकिन उनके सामने जनता के बहुत सारे सवाल है? सूत्रों के मुताबिक मनीष सिसोदिया अपने को बड़ा मानते थे। और इसी के चलते उन्होंने लगातार 12 साल तक इस विधानसभा क्षेत्र की ओर ध्यान ही नहीं दिया‌। वह कुछ चंद लोगों के कहने पर चलते रहे। विधानसभा के आम लोगों से उनका कोई सरोकार नहीं था। इसका खामियाजा अब आप प्रत्याशी ओझा को उठाना पड़ रहा है। लेकिन उनका दावा है कि पूर्वांचल समाज व पार्टी का बड़ा वोट बैंक उनके साथ है। और डिप्टी सीएम द्वारा क्षेत्र में कराए गए चाहू मुखी विकास लाभ भी उन्हें मिलेगा। इसको लेकर वह अपनी जीत के लिए आशवस्त है।
लेकिन विधानसभा के निवासियों द्वारा यह सवाल भी प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं।
क्रमशः सिसोदिया के 12 वर्षों के कार्यकाल में क्षेत्र में गहरी नाराजगी। डिप्टी सीएम रहते हुए विधानसभा क्षेत्र रहा उपेक्षित सिसोदिया के द्वारा विधानसभा छोड़ने के बाद कार्यकर्ताओं का मनोबल भी कमजोर पड़ गया। सूत्रों की माने तो कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का रुख कर लिया है। ओझा की गंभीरता पर सवाल? क्षेत्र में चर्चा है कि उन्हें सिर्फ सिसोदिया की छवि बचाने के लिए मैदान में उतारा गया है । क्षेत्रीय राजनीतिक जानकारों के मुताबिक मुताबिक नामांकन से लेकर प्रचार तक में शिथिलता बरती गई। राजनीतिक पंडितों के मुताबिक इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस कैडर वोटर जो आप में चला गया था , वह वोटर वापस अब कांग्रेस की तरफ लौटते दिख रहे हैं।
*कांग्रेस के पक्ष में बढ़ता जनाधार*
कांग्रेस के भाई अनिल कुमार इस बार चुनावी दौड़ में सबसे आगे नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस के प्रति जनता का रुझान क्यों?
शराब घोटाले का पर्दाफाश: भाई अनिल कुमार ने शराब घोटाले को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई।कोरोना के दौरान सक्रियता: महामारी के समय वे जनता के साथ खड़े रहे और राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भाजपा उम्मीदवार के विपरीत प्रवासी मजदूरों और गरीबों के लिए उनका सहयोग उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है। विधायक और पार्षद के रूप में उनके काम, जैसे क्षेत्र में गंगाजल की सप्लाई बढ़ाकर शुद्ध जल उपलब्ध कराना।
जनता का रुझान
पटपड़गंज की जनता अब बदलाव चाहती है। भाजपा और आप से निराश जनता कांग्रेस के अनिल कुमार में अपना भविष्य देख रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कांग्रेस ऐतिहासिक मतों से जीत दर्ज कर सकती है। पटपड़गंज का भविष्य किसके हाथ में होगा, यह चुनावी नतीजों के बाद ही तय होगा, लेकिन जनता की नब्ज टटोलने पर पता चलता है कि क्षेत्र की जनता बदलाव के मूड में है। बदलाव के लिए क्षेत्र के नागरिकों की पहली प्राथमिकता कांग्रेस को मान कर चल रहे है। विधानसभा क्षेत्र निवासियों के मुताबिक इसका कारण कांग्रेस प्रत्याशी अनिल चौधरी है, जो हमेशा क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। रह वासियों के मुताबिक वह हार के बाद भी क्षेत्र में डटे रहे हैं। और समय-समय पर क्षेत्र में व्याप्त विभिन्न समस्याओं के लिए संघर्ष करते रहें हैं। सूत्रों के मुताबिक उनका लंबे समय से लोगों के बीच डटा रहना ही उनकी जीत का रास्ता साफ कर रहा है। ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो समय ही बताएगा। लेकिन मुकाबला दिलचस्प होने के असर नजर आ रही है। अनिल कुमार के समर्थक भी उनकी जीत निश्चित मानकर चल रहे हैं। कुल मिलाकर भाजपा व कांग्रेस दोनों पार्टियों के प्रत्याशी आम आदमी के वोटरों का रुझान अपनी-अपनी और होना मानकर चल रहे हैं। जीत का सेहरा किसके सर बंधेंगे यह तो आने वाला समय ही बताएगा । लेकिन भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगाए हुए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक आप उम्मीदवार चुनाव की दौड़ में इन दोनों से काफी पीछे हैं। विशेषज्ञों का मानना है की मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है। वैसे तो सभी पार्टियों के प्रत्याशी अपनी अपनी-अपनी जीत का दवा कर रहे हैं। लेकिन  सूत्रों के  मुताबिक मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा के बीच माना जा रहा है।