‘हलाल सर्टिफिकेट से चीजों की कीमत बढ़ती है…सरिया और सीमेंट कैसे हलाल!’, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने उठाए सवाल
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि हलाल सर्टिफिकेशन से चीजों की कीमत बढ़ती है। यूपी में हलाल सर्टिफिकेट वाली चीजों को रखने, बिक्री पर रोक संबंधी आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। इस सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच के सामने ये बात सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कही। तुषार मेहता ने कहा कि गैर मांस उत्पादों का भी हलाल सर्टिफिकेशन हो रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को भी ये जानकर हैरत होगी कि आखिर लोहे की सरिया और सीमेंट कैसे हलाल हो सकता है! सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेट देने के लिए एजेंसियां पैसा लेती हैं। इससे चीजों की कीमत में बढ़ोतरी होती है।
तुषार मेहता ने कहा कि बेसन और आटा को भी हलाल सर्टिफिकेट दिया जा रहा है। जबकि, दोनों चीजें हलाल सर्टिफिकेट के दायरे में कैसे आ सकती हैं। केंद्र की नीति कहती है कि ये जीवनशैली का मामला है। ये सब स्वैच्छिक है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि उन लोगों को ज्यादा कीमत क्यों चुकानी चाहिए, जो हलाल उत्पादों में यकीन नहीं रखते या इसका इस्तेमाल नहीं करते। इस पर याचिका करने वालों के वकील ने कहा कि ये उनकी पसंद का मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलीलों को सुनने के बाद याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया। अब 24 मार्च से शुरू होने वाले हफ्ते में इस पर सुनवाई होगी।
यूपी सरकार ने खाद्य सुरक्षा और मानक एक्ट 2006 के तहत 18 नवंबर 2023 को अधिसूचना जारी कर हलाल सर्टिफिकेशन पर रोक लगाई थी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि इस तरह की अधिसूचना जारी करना राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है। वहीं, हलाल सर्टिफिकेट वाली चीजों के भंडारण, बिक्री और वितरण पर रोक के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाते हुए इसे गलत बताया है। सुप्रीम कोर्ट का इस बारे में जो भी फैसला आएगा, वो काफी दूरगामी असर करेगा। क्योंकि अगर हलाल सर्टिफिकेशन पर रोक को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया, तो अन्य राज्य भी इस संबंध में आदेश जारी कर सकते हैं।
