उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी लागू हो सकता है यूसीसी, जानिए इस कानून से क्या बदलाव होता है
अहमदाबाद। उत्तराखंड के बाद अब गुजरात की बीजेपी सरकार भी समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी का कानून बना सकती है। ये जानकारी सूत्रों के जरिए आई है। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने 27 जनवरी 2025 से राज्य में यूसीसी लागू कर दी है। जब उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी बिल का ड्राफ्ट तैयार कराया था, उस वक्त राजस्थान और असम की बीजेपी सरकारों ने कहा था कि वो भी अपने राज्यों में यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। माना जा रहा है कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद देर-सवेर बीजेपी शासित अन्य राज्यों में भी यूसीसी बिल पास कराकर कानून लागू किया जाएगा।
उत्तराखंड में बीजेपी ने साल 2022 के विधानसभा चुनाव में वादा किया था कि अगर उसकी फिर सरकार बनी, तो राज्य में यूसीसी लागू किया जाएगा। इस मुद्दे पर उत्तराखंड की जनता ने बीजेपी को बड़ा बहुमत देकर लगातार दूसरी बार सरकार बनवाई थी। जिसके बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में यूसीसी बिल का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी का गठन किया था। जस्टिस देसाई की कमेटी की तरफ से मिले यूसीसी बिल का ड्राफ्ट धामी सरकार ने बहुमत से उत्तराखंड विधानसभा से पास कराया था। उत्तराखंड के यूसीसी कानून की खास बात ये है कि राज्य से बाहर रहने वाले मूल निवासियों पर भी ये लागू होता है।
यूसीसी कानून के तहत सभी समुदायों के लोगों के लिए शादी, तलाक, गोद लेने, विरासत वगैरा संबंधी कानून एक होते हैं। इन मामलों में कोई पर्सनल लॉ लागू नहीं होता। इसके अलावा उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी कानून में ये प्रावधान भी किया है कि लिव इन रिलेशनशिप को भी रजिस्टर्ड कराना होगा। इस तरह किसी विवाद से बचाव हो सकेगा। माना जा रहा है कि गुजरात सरकार अगर यूसीसी कानून का बिल तैयार कराती है, तो ये उत्तराखंड में लागू यूसीसी जैसा हो सकता है। आजादी से पहले जब गोवा में पुर्तगाल का शासन था, उस वक्त वहां यूसीसी लागू किया गया था। संविधान में भी देश में यूसीसी लागू करने के लिए कहा गया है।
