‘सरकारी धन से बाबरी मस्जिद बनाना चाहते थे जवाहरलाल नेहरू’, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा दावा
वडोदरा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बारे में बड़ा दावा किया है। गुजरात के वडोदरा के सांधली गांव में मंगलवार को यूनिटी मार्च कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने दावा किया कि जवाहरलाल नेहरू सरकारी धन से बाबरी मस्जिद बनाना चाहते थे। ऐसा करने से उनको तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने रोका था। राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ ताकतें सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत को मिटाना चाहते हैं। राजनाथ सिंह के नेहरू के बारे में दिए गए बयान पर सियासत गर्माने के आसार हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरदार पटेल ने जवाहरलाल नेहरू से साफ कहा था कि धार्मिक स्थलों पर सरकारी धन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। राजनाथ सिंह ने कहा कि जब गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का मसला आया, तो सरदार पटेल ने साफ तौर पर कहा कि इसके लिए जनता ने 30 लाख रुपए दान दिए हैं। सोमनाथ मंदिर बनाने में एक पैसा भी सरकार का नहीं लगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के वक्त सरदार पटेल की बात मानी गई होती, तो ये मुद्दा इतना लंबा नहीं चलता। रक्षा मंत्री ने हैदराबाद का उदाहरण भी दिया।
उन्होंने कहा कि सरदार पटेल समस्याओं को बातचीत में हल करने पर भरोसा रखते थे, लेकिन जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटते थे। मोदी सरकार ने भी इसी नीति पर चलते हुए दुनिया को ऑपरेशन सिंदूर के जरिए अपनी ताकत दिखाई। राजनाथ सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करना छोटा कदम नहीं था। इस कदम से जम्मू-कश्मीर भारत की मुख्यधारा से जुड़ा। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत अपनी शर्तों पर दुनिया से बात कर रहा है। भारत बड़ी आर्थिक और सामरिक ताकत बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है। बाबरी मस्जिद में 22-23 दिसंबर 1949 की रात मूर्तियां प्रकट होने की बात कही जाती है। इसके बाद ही वहां ताला लगा दिया गया था। जिसे राजीव गांधी की सरकार के वक्त कोर्ट के आदेश पर 1 फरवरी 1986 को खोला गया था।
