कनाडा में खालिस्तान समर्थकों को जोर का झटका, जगमीत सिंह की संसदीय चुनाव में हार, पार्टी का राष्ट्रीय दर्जा भी खत्म
ओटावा। कनाडा के संसदीय चुनाव में खालिस्तान समर्थकों को बड़ा झटका लगा है। खालिस्तान के समर्थक सिख नेता जगमीत सिंह चुनाव हार गए। जगमीत सिंह बर्नबी सेंट्रल सीट से मैदान में उतरे थे। इतना ही नहीं, जगमीत सिंह की नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी का राष्ट्रीय दर्जा भी खत्म हो गया है। इसकी वजह ये है कि जगमीत सिंह की एनडीपी ने 343 सीट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन 12 सीट ही जीत सकी। इससे पहले कनाडा के पिछले संसदीय चुनाव में जगमीत सिंह की एनडीपी को 24 सीट पर जीत हासिल हुई थी। एनडीपी ने तब जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व वाली लिबरल पार्टी को समर्थन देकर सरकार बनवाई थी।
कनाडा की संसद में 343 सीट हैं। ऐसे में बहुमत के लिए 172 सीट की जरूरत है। खबर लिखे जाने तक सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी 164 सीट पर आगे है। यानी मार्क कार्नी का एक बार फिर पीएम बनना तय है। वहीं, विपक्षी नेता पियरे पॉलिव्रे का पीएम बनने का सपना टूट गया है। पियरे की कंजरवेटिव पार्टी 147 सीट पर बढ़त बनाए है। बीक्यू यानी ब्लॉक क्यूबकोइस 23 सीट पर आगे है। कनाडा में कुल 28.9 मिलियन वोटर हैं। इनमें से 7.3 मिलियन ने ही सोमवार को कनाडा के संसदीय चुनाव में वोट डाला था। कनाडा में मार्क कार्नी के एक बार फिर पीएम बनने के कारण अमेरिका से उनके देश की तनातनी जारी रह सकती है। मार्क कार्नी अमेरिका की कुछ नीतियों के घोर विरोधी माने जाते हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने जब कनाडा पर टैरिफ लगाने का एलान किया था, तब कार्नी ने बदले में एक्शन लेने की बात भी कही थी।
मार्क कार्नी ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। फिर उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर्स और फिर डॉक्टरेट किया। मार्क कार्नी 2003 में बैंक ऑफ कनाडा में डिप्टी गवर्नर बने थे। इससे पहले वो गोल्डमैन सैक्स के साथ काम कर रहे थे। साल 2004 में मार्क कार्नी को कनाडा सरकार के वित्त विभाग में वरिष्ठ सहयोगी उप मंत्री बनाया गया था। इसके बाद 2008 से 2013 तक मार्क कार्नी बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर रहे। 2011 से 2018 तक मार्क कार्नी वित्तीय स्थिरता बोर्ड के भी अध्यक्ष रहे। फिर मार्क कार्नी ने ब्लूमबर्ग के डायरेक्टर के तौर पर काम किया। संयुक्त राष्ट्र ने उनको जलवायु संबंधी कार्रवाई और वित्त मामलों का विशेष दूत भी बनाया था। कोविड के दौरान मार्क कार्नी तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो के सलाहकार भी रहे। 2024 में लिबरल पार्टी ने उनको आर्थिक विकास कार्यबल का अध्यक्ष बनाया। फिर जनवरी 2025 में जस्टिन ट्रूडो के पीएम पद से इस्तीफे के बाद मार्क कार्नी पीएम बने और संसदीय चुनाव कराने का एलान किया।
