April 24, 2026

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कोरोना से हर भारतीय की दो साल कम हो गई जिंदगी, इंटरनेशनल स्टडी में हुआ खुलासा

नई दिल्ली। कोरोना वायरस ने दुनियाभर के लाखों परिवारों को तबाह कर दिया। किसी के परिवार का कोई सदस्य छीन लिया तो किसी का रोजगार छिना तो उन्होंने अपनी जिंदगी ही खत्म कर ली। जैसे-तैसे अब एक बार फिर देशों की अर्थव्यवस्था पटरी पर आने लगी है। इस बीच कोरोना को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है जो कि चैकाने वाली है। एक अंतरराष्ट्रीय शोध के अनुसार, कोरोना के कारण भारतीयों की जीवन प्रत्याशा दो साल तक कम हो गई है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन स्टडीज (IIPS) के अनुसार, साल 2019 में भारतीय पुरुषों की जीवन प्रत्याशा 69.5 साल थी जो कि साल 2020 में कम होकर 67.5 साल रह गई है। ऐसे ही भारतीय महिलाओं की जीवन प्रत्याशा जो कि 2019 में 72 साल हुआ करती थी वो अब 69.8 साल पर आ गई है। IIPS के असिस्टेंट प्रोफेसर सूर्यकांत यादव की ये स्टाडी ‘बीएमसी पब्लिक हेल्थ’ जर्नल में छपी है।

क्या होती है जीवन प्रत्याशा ?

‘जन्म‍ के समय जीवन प्रत्याशा’ का मतलब उस औसम समयकाल से होता है जितने वक्त तक एक नवजाते बच्चे के जीने की संभावना होती है। अगर बाकी पैटर्न्सा भविष्यम में वैसे ही रहें तो। इस नई स्टडी में अलग-अलग उम्र के जीवनकाल में आए बदलावों पर भी नजर डाली गई तो ये पता चला कि 35 साल से 69 साल के एजग्रुप में पुरुषों के मरने की दर सबसे अधिक थी। एक्सपपर्ट की मानें तो साल 2020 में कोरोना के कारण इस उम्र के लोगों की ज्यादा मौतें हुईं और उसकी वजह से जीवन प्रत्याशा में गिरावट पर खासा असर पड़ा।

सूर्यकांत यादव की मानें तो ‘जीवन प्रत्याशा बढ़ाने के लिए पिछले दशक में हमें जो भी प्रगति की थी, कोविड ने उसपर पानी फेर दिया है।’ उन्होंने कहा कि भारत में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा अब उतनी ही है जितनी साल 2010 में थी। हमें अब 2019 की स्थिति तक पहुंचने में ही कई सालों का वक्त लग जाएगा।

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