जस्टिस शेखर कुमार यादव पर महाभियोग प्रस्ताव मामले में ये है ताजा अपडेट, विपक्ष ने लगाया है गंभीर आरोप
नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव पर महाभियोग चलाने के लिए विपक्ष ने राज्यसभा के 50 सांसदों के दस्तखत जुटाए हैं। जस्टिस शेखर कुमार यादव पर महाभियोग चलाने के लिए राज्यसभा सचिवालय को विपक्ष की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था। राज्यसभा सचिवालय ने महाभियोग प्रस्ताव में जिन 54 सांसदों का नाम था उनसे संपर्क किया। इस पर 44 सांसदों ने दस्तखत करने की पुष्टि की। वहीं, अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी है कि 6 और सांसदों ने दस्तखत की पुष्टि की है। इस तरह जस्टिस शेखर कुमार यादव पर महाभियोग चलाने के लिए जरूरी 50 राज्यसभा सांसदों को विपक्ष ने जुटा लिया है।
राज्यसभा सचिवालय ने बताया है कि जस्टिस शेखर कुमार यादव पर महाभियोग चलाने के विपक्ष के प्रस्ताव में जिन सांसदों के दस्तखत हैं, उनमें से 9 के हस्ताक्षर रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे। वहीं, सांसद सरफराज अहमद के दस्तखत 2 जगह हैं। इस वजह से सांसदों को ई-मेल भेज और फोन कर कहा गया कि वे जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ अपने साथ न्यूज रिपोर्ट, कानूनी दस्तावेज और यूट्यूब लिंक वगैरा की प्रति लेकर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से मिलें। 13 दिसंबर 2024 को राज्यसभा के सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने 54 सांसदों के नाम और दस्तखत वाला महाभियोग प्रस्ताव राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी को सौंपा था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर यादव पर विपक्ष ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 8 दिसंबर 2024 को प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद यानी वीएचपी के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। विपक्ष का आरोप है कि वीएचपी के इस कार्यक्रम में जस्टिस शेखर कुमार यादव ने भाषण दिया। विपक्ष का कहना है कि जस्टिस शेखर कुमार यादव ने भाषण में यूसीसी का समर्थन किया और कहा कि उनको ये कहते हुए कोई हिचक नहीं कि ये हिंदुस्तान है और देश बहुसंख्यकों की इच्छा के मुताबिक चलेगा। जस्टिस शेखर कुमार यादव पर विपक्ष ने ये आरोप भी लगाया कि उन्होंने भाषण में मुस्लिम समुदाय की आलोचना की और कहा कि अगर हमारी परंपराओं में सती प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और जौहर जैसी बुराइयों को खत्म किया गया, तो एक से ज्यादा शादी की प्रथा भी खत्म होनी चाहिए। जस्टिस शेखर कुमार यादव के इस बयान को विपक्ष ने हेट स्पीच और संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है।
