अगले महीने से पूरे देश में वोटरों के विशेष पुनरीक्षण की तैयारी कर रहा चुनाव आयोग, इन दस्तावेजों में से एक देना पड़ेगा
नई दिल्ली। अपने कागजात दुरुस्त कर लीजिए। बिहार की ही तरह चुनाव आयोग अब देशभर में वोटरों का विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) शुरू करने वाला है। अखबार नवभारत टाइम्स के मुताबिक चुनाव आयोग अगस्त यानी अगले महीने से पूरे देश में वोटरों का विशेष पुनरीक्षण शुरू करेगा। चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को इस विशेष पुनरीक्षण के लिए तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।
पूरे देश में वोटरों के विशेष पुनरीक्षण के लिए चुनाव आयोग बूथ लेवल अफसर यानी बीएलओ की ट्रेनिंग भी करा रहा है। चुनाव आयोग वोटर लिस्ट में प्रामाणिकता बनाए रखना चाहता है। चुनाव आयोग ने 24 जून से बिहार में वोटरों का विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। ये अभियान 25 जुलाई तक चलेगा। चुनाव आयोग ने बताया था कि शुक्रवार तक 66 फीसदी वोटरों ने विशेष पुनरीक्षण के लिए फॉर्म भरकर जमा कर दिए थे। हालांकि, बिहार में वोटरों के विशेष पुनरीक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के अभियान को रोकने से इनकार कर दिया है। इस मामले में अब 28 जुलाई को सुनवाई होनी है।
वोटरों के विशेष पुनरीक्षण की तैयारी के तहत दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब के मुख्य चुनाव अधिकारियों ने राज्य चुनाव आयोग की वेबसाइट पर पुरानी वोटर लिस्ट डाल दी है। बाकी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों की तरफ से भी पुरानी वोटर लिस्ट वेबसाइट पर जल्द डाले जाने की उम्मीद है। अधिकतर राज्यों में इससे पहले 2002 से 2004 के बीच वोटर लिस्ट को अद्यतन बनाया गया था। बिहार में 2003 की लिस्ट में जिनके नाम हैं, उनको सिर्फ फॉर्म भरना है।
जबकि, जिनका नाम इस लिस्ट में नहीं है, वे अपने फॉर्म के साथ बर्थ सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, जन्मतिथि दर्शाने वाला बोर्ड या यूनिवर्सिटी का सर्टिफिकेट, सरकारी कर्मचारी होने की आईडी, पेंशनभोगी हैं तो पीपीओ, 1 जुलाई 1987 से पहले जारी बैंक, डाकघर, एलआईसी की आईडी, राज्य सरकार का दिया स्थायी निवास प्रमाण पत्र, वन अधिकार सर्टिफिकेट, जाति का सर्टिफिकेट, एनआरसी का दस्तावेज, सरकारी मकान या जमीन आवंटन या रजिस्ट्री का सर्टिफिकेट, स्थानीय प्राधिकारी के पारिवारिक रजिस्टर में दर्ज नाम के दस्तावेज दे सकते हैं।
