उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाए जाएंगे गीता और रामायण के श्लोक, आदेश जारी
नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में प्रतिदिन सुबह होने वाली प्रार्थना सभा के दौरान गीता या रामायण का एक श्लोक बच्चों को पढ़ाया जाएगा। सरकार की तरफ से इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। बच्चों को रोजाना एक श्लोक अर्थ सहित सुनाया जाएगा ताकि वो उसे अच्छी तरह समझ सकें और जीवन में आत्मसात कर सकें। इस तरह से आधुनिक शिक्षा के साथ बच्चों का भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणाली से भी जुड़ाव होगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को आदेश की कॉपी भिजवा दी है।
शिक्षकों को हर सप्ताह गीता या रामायण के एक श्लोक को ‘श्लोक ऑफ द वीक’ घोषित कर उसे स्कूल के नोटिस बोर्ड पर अर्थ सहित लिखने का निर्देश दिया गया है। छात्र इसका अभ्यास करेंगे और सप्ताह के अंत में उस पर चर्चा होगी तथा फीडबैक लिया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि बच्चों को गीता या रामायण के श्लोक सिर्फ कंठस्थ कराने की जगह उनको उसके महत्व से परिचित कराना है। उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ शिक्षा विभाग की बैठक में हमने एनसीईआरटी को उत्तराखंड के 17,000 सरकारी स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम में भगवद्गीता और रामायण को शामिल करने का काम सौंपा है। जब तक पाठयक्रम में यह बदलाव नहीं हो जाता तब तक स्कूलों में होने वाली दैनिक प्रार्थना सभाओं में भगवद्गीता और रामायण के श्लोक शामिल किए जाने का निर्णय लिया गया है।
उधर, उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने प्रदेश सरकार की इस पहल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण के श्लोक का पाठ कराना अच्छी बात है। राम और कृष्ण के बारे में हर भारतीय को जानना चाहिए। आपको बता दें कि 6 मई को आयोजित एक बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्कूलों में श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण को शामिल करने के निर्देश दिए थे।
