उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में रील बनाने वालों पर कसा शिकंजा; उत्तराखंड सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला
देहरादून। उत्तराखंड के चार धामों में रील बनाने पर रोक लगा दी गई है। चारधाम यात्रा के दौरान मर्यादा और मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ में मोबाइल फोन ले जाने पर रोक लगाई गई है। उत्तराखंड सरकार का कहना है कि मोबाइल फोन ले जाने पर रोक से गैरजरूरी विवाद नहीं होंगे। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए एकाग्रता से भगवान के दर्शन करना संभव हो सकेगा।
जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड में इस साल होने वाली चारधाम यात्रा से पहले समीक्षा बैठक में मोबाइल फोन पर रोक का फैसला किया गया। ये बैठक गढ़वाल मंडल के आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में हुई। इसमें चारधाम यात्रा से जुड़े जिलों के डीएम और अन्य अफसर भी मौजूद थे। आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि बीते कुछ साल में चारधाम यात्रा के दौरान मोबाइल से रील और व्लॉगिंग के कारण कई बार विवाद की स्थिति बनी। ऐसे विवादों से चारों धाम की गरिमा पर असर पड़ता है। इस वजह से गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ में कोई भी मोबाइल नहीं ले जा सकेगा। बदरीनाथ में सिंहद्वार से आगे मोबाइल पर बैन रहेगा।
आयुक्त ने बताया कि जो श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आएंगे, उनके मोबाइल फोन सुरक्षित रखने के लिए श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर कमेटी और जिला प्रशासन जरूरी व्यवस्था करेंगे। पहली बार ऐसा हुआ है, जब चारों धाम की पवित्रता बनाए रखने के लिए सरकार ने वहां मोबाइल फोन ले जाने पर रोक लगा दी है। बीते साल चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ, बदरीनाथ में रील बनाने की तमाम घटनाएं हुईं। रील बनाने वाले मंदिरों से जुड़े लोगों की आपत्ति पर भी ध्यान नहीं दे रहे थे। इस वजह से सोशल मीडिया पर भी बहुत से श्रद्धालुओं ने सवाल खड़े किए थे। आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने ये भी बताया कि चारधाम यात्रा के लिए पहले की तरह 60 फीसदी ऑफलाइन और 40 फीसदी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होगा। जाम न होने देने के लिए छोटी शटल बसें लगाई जाएंगी। ब्रह्मपुरी चौकी के पास हाइवे भी चौड़ा किया जाएगा। साल 2025 में चारधाम यात्रा में 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे थे।
