‘जब तक भारत धर्म से निर्देशित रहेगा…’, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान
मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने अब धर्म की व्याख्या की है। मुंबई में विहार सेवक ऊर्जा मिलन समारोह में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि धर्म हम सभी के पीछे की प्रेरक शक्ति है। उन्होंने कहा कि अगर हम धर्म की चलाई जा रही गाड़ी में बैठेंगे, तो हमारा कभी एक्सीडेंट नहीं होगा। पहली बार है जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने धर्म की इस तरह व्याख्या की है।
मोहन भागवत ने कहा कि ब्रह्मांड को धर्म चलाता है। सेक्युलर देश में धर्म के महत्व पर उन्होंने कहा कि कोई राज्य पंथ निरपेक्ष हो सकता है, लेकिन कोई भी जीवित या निर्जीव प्राणी धर्म के बिना मौजूद नहीं रह सकता। आरएसएस प्रमुख भागवत ने पानी के धर्म का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पानी का भी धर्म होता है। बहना उसका धर्म है। मोहन भागवत ने कहा कि जब तक भारत धर्म से निर्देशित रहेगा, वो विश्वगुरु बना रहेगा। उन्होंने इसकी ये वजह बताई कि दुनिया में आध्यात्मिक ज्ञान की कमी है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पहली बार धर्म की बड़े रूप में व्याख्या की है। मोहन भागवत बीते काफी समय से हिंदुओं में जातिभेद खत्म कर एकजुटता कराने की कोशिश में लगे हैं। आरएसएस प्रमुख ने बीते एक साल में जहां भी संबोधन दिया है, उसमें हिंदुओं से एकजुट रहने के लिए कहा है। साथ ही मोहन भागवत सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ भी जनजागरण करते रहे हैं। आरएसएस प्रमुख ने भारत में सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एकमत बनाने के लिए कई बड़े मुस्लिम धर्मगुरुओं से भी मुलाकात की थी। अब उनकी तरफ से धर्म की व्याख्या किया जाना बहुत अहम है। क्योंकि आम तौर पर लोग यही समझते हैं कि अपने पंथ के नियमों को मानना ही धर्म है। जबकि, श्रीमद्भगवतगीता में भी भगवान कृष्ण ने अर्जुन को धर्म का अर्थ समझाया। जिसमें उन्होंने कर्म को ही धर्म बताया है।
