‘अवैध निर्माण को मंजूरी देने वाले अफसरों पर सख्त कार्रवाई जरूरी’, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने होटल गिराने का आदेश देते हुए की सख्त टिप्पणी
श्रीनगर। आए दिन कहीं न कहीं से ये खबर आती है कि फलां दुकान या कोई मकान अवैध तरीके से बना और उसे अब गिराया जा रहा है। ऐसे ही एक मामले में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने श्रीनगर में एक होटल के अवैध निर्माण को गिराने का आदेश देते हुए कहा है कि शहर में इस तरह लगातार अवैध निर्माण होना चिंता का विषय है। जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की बेंच ने ये भी कहा कि वक्त आ गया है कि अवैध निर्माण की मंजूरी देने वाले अफसरों पर संबंधित प्राधिकारी कार्रवाई करें।
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि नीति में बदलाव कर भवन बनाने के नियमों को फिर से देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जो भी अफसर अवैध बिल्डिंग बनाने की मंजूरी देने में शामिल हों, उनके खिलाफ सख्त जुर्माना लगाने की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि श्रीनगर में जिस होटल का निर्माण किया गया, उसमें सेटबैक के नियमों का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि बिल्डिंग प्लान के तहत होटल के हर फ्लोर का बिल्ट अप एरिया 9159 वर्ग फिट होना चाहिए था, लेकिन 19900 वर्ग फिट बिल्ट अप एरिया बनाया गया। कोर्ट से होटल मालिकों के वकील ने गुजारिश की थी कि निर्माण को गिराने की जगह जुर्माना लगाया जाए, लेकिन इसे माना नहीं गया।
होटल मालिकों के वकील ने दलील दी थी कि होटल को बनाने में काफी रकम खर्च हुई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि जो लोग कानून को नहीं मानते, उनसे बराबरी का व्यवहार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों पर रहम नहीं दिखाया जा सकता। इस मामले में कोर्ट ने पाया कि होस्टल और गेस्ट हाउस बनाने के नाम पर तीन अलग-अलग निर्माण की मंजूरी ली गई, लेकिन इन तीनों को मिलाकर एक होटल बना दिया गया। जबकि, होटल बनाने के लिए बहुत कठिन शर्तें होती हैं। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी में कहा कि श्रीनगर विकास प्राधिकरण के अफसरों की मिलीभगत के बिना नियमों का इतना बड़ा उल्लंघन नहीं हो सकता था। कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार से कहा कि वो इन अफसरों पर सख्त कार्रवाई करे।
