मोदी सरकार ने सिंधु जल संधि को रद्द करके नेहरू की नीतियों की गलतियों को सुधारा, राज्यसभा में बोले विदेश मंत्री एस. जयशंकर
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में आज भी चर्चा जारी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में सरकार का पक्ष रखते हुए साफ शब्दों में कहा कि सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं कर देता है। उन्होंने पीएम मोदी की बात को दोहराया, खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। सिंधु जल संधि के मुद्दे पर जयशंकर ने कांग्रेस को भी घेरा। विदेश मंत्री बोले, मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करके नेहरू की नीतियों की गलतियों को सुधारा है।
विदेश मंत्री ने कहा, सिंधु जल संधि कई मायनों में एक अनूठा समझौता था। मैं दुनिया में किसी अन्य ऐसे समझौते के बारे में नहीं सोच सकता जहां किसी देश ने अपनी प्रमुख नदियों को दूसरे देश में बहने दिया हो, बिना उन पर अधिकार बनाए। इसलिए, यह एक असाधारण समझौता था और अब जबकि हमने इसे रद्द कर दिया है, इसके पीछे के इतिहास को याद करना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष को निशाने पर लेते हुए कहा कि कल मैंने लोगों को सुना, कुछ लोग इतिहास से असहज हैं। वे चाहते हैं कि ऐतिहासिक चीजों को भुला दिया जाए। शायद यह उन्हें शोभा नहीं देता, वे केवल कुछ चीजों को याद रखना पसंद करते हैं।
जयशंकर ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री को पंजाब, राजस्थान, हरियाणा के किसानों की चिंता नहीं थी, उनको पाकिस्तान के पंजाब के किसानों की चिंता थी और इसीलिए सिंधु नदी समझौता किया गया। कहा गया कि ये शांति की कीमत थी, यह तुष्टिकरण की कीमत थी। विदेश मंत्री ने कहा कि हम आतंकवाद का दंश 1947 से झेलते आ रहे हैं। भारत में हुए आतंकी हमलों को दुनिया ने देखा है। जयशंकर ने पहलगाम हमले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पाकिस्तान दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है।
