उत्तराखंड में रक्षाबंधन: पर्व, परंपरा और पर्वतों की संस्कृति
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रविन्द्र बंसल प्रभारी यूपी, यूके / हिंद फोकस न्यूज़
उत्तराखंड में रक्षाबंधन: पर्व, परंपरा और पर्वतों की संस्कृति
रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। उत्तराखंड की वादियों में यह त्योहार अपनी अलग ही छटा बिखेरता है। यहाँ के पर्वतीय जीवन, लोकगीतों, और रीति-रिवाजों में रक्षाबंधन का रंग कुछ और ही गहरा होता है।
पर्व की शुरुआत और धार्मिक महत्व
श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन उत्तराखंड में “सलूनो” या “श्रावणी” के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों को जीवनभर रक्षा का वचन देते हैं।
गढ़वाल और कुमाऊँ क्षेत्र में इसे केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं, बल्कि गुरु और शिष्य, तथा गांव के अन्य सामाजिक रिश्तों में भी “रक्षा सूत्र” बांधने की परंपरा है।
उत्तराखंड में रक्षाबंधन की विशेषताएँ
1. पर्वतीय मिठास – इस दिन घर-घर में सिंघोड़ी, बाल मिठाई, अरसा, और गठिया जैसी पारंपरिक मिठाइयाँ बनाई जाती हैं।
2. लोकगीत और लोकनृत्य – बहनें राखी बांधते समय “रक्षाबंधन गीत” और पारंपरिक झोड़ा-चांचरी गाती हैं, जिनमें पर्वतीय बोली का मधुर स्पर्श होता है।
3. प्रकृति से जुड़ाव – कुछ जगहों पर इस दिन झूला डालने और पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर पर्यावरण संरक्षण की परंपरा भी निभाई जाती है।
4. गंगा और तीर्थ स्नान – हरिद्वार, ऋषिकेश और देवप्रयाग जैसे स्थानों पर श्रावण पूर्णिमा को गंगा स्नान का विशेष महत्व है।
समाज में जुड़ाव का अवसर
उत्तराखंड के ग्रामीण अंचलों में रक्षाबंधन मेल-मिलाप का अवसर भी होता है। दूर-दराज़ में बसे परिवार इस दिन एक साथ मिलते हैं, रिश्तों को दोबारा ताज़ा करते हैं और घर का बना खाना साथ बैठकर खाते हैं।
आज के समय में महत्व
भले ही तकनीक और आधुनिकता ने दूरियों को कम किया हो, लेकिन उत्तराखंड में रक्षाबंधन अब भी भावनाओं और रिश्तों की डोर को और मजबूत करने का काम करता है। यह त्योहार हमें यह याद दिलाता है कि पहाड़ केवल भूगोल नहीं, बल्कि भावनाओं का भी घर हैं, जहाँ रिश्ते पहाड़ों की तरह मजबूत और नदियों की तरह पवित्र होते है।
उत्तराखंड में रक्षाबंधन: पर्व, परंपरा और पर्वतों की संस्कृति
रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। उत्तराखंड की वादियों में यह त्योहार अपनी अलग ही छटा बिखेरता है। यहाँ के पर्वतीय जीवन, लोकगीतों, और रीति-रिवाजों में रक्षाबंधन का रंग कुछ और ही गहरा होता है।
