नोएडा अथॉरिटी में भ्रष्टाचार के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिए कई सारे अहम आदेश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश देते हुए यूपी की नोएडा अथॉरिटी के अफसरों के भ्रष्टाचार और बिल्डरों से उनके साठ-गांठ के आरोपों की जांच के लिए नई एसआईटी बनाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा है कि वो नोएडा को महानगर परिषद में बदलने के बारे में भी फैसला करे। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच को पहले बनी एसआईटी की ओर से ये जानकारी दी गई कि नोएडा के अफसरों के भ्रष्टाचार और बिल्डरों से उनकी दोस्ती की वजह से किसानों को काफी मुआवजा दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि किसानों से मिलीभगत की जांच के लिए नोएडा अथॉरिटी के अफसरों और परिवार के लोगों के बीते 10 साल में अर्जित संपत्तियों की फॉरेंसिक जांच की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद एक नई एसआईटी बनाकर जांच के लिए कहा। इस एसआईटी में तीन आईपीएस अफसरों के अलावा फॉरेंसिक, अकाउंट्स और आर्थिक अपराध शाखा के अफसर भी होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया कि पहले बनाई गई एसआईटी ने जांच के बाद जो रिपोर्ट उसके सामने पेश की है, उसे यूपी कैबिनेट के सामने रखा जाए। जिसके आधार पर यूपी सरकार नोएडा अथॉरिटी का स्तर बदलने के बारे में विचार करे। सुप्रीम कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी को ये निर्देश भी दिया कि नोएडा अथॉरिटी में भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के वास्ते तत्काल आईपीएस या सीएजी के अफसर को मुख्य सतर्कता अफसर नियुक्त किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा कि नोएडा में रहने वालों की राय जानने के लिए तुरंत नागरिक सलाहकार बोर्ड का भी गठन हो। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी के अफसरों और बिल्डरों के बीच साठ-गांठ की जांच के लिए एसआईटी बनाई थी। इस एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को दी। अब सुप्रीम कोर्ट ने नई एसआईटी बनाकर गहन जांच के आदेश दिए हैं। इससे नोएडा अथॉरिटी के तमाम अफसरों और बिल्डरों के लिए दिक्कत भी पैदा हो सकती है। बता दें कि नोएडा अथॉरिटी में भ्रष्टाचार की शिकायत पहले भी होती रही है। यहां तक कि नोएडा अथॉरिटी की सीईओ रहीं नीरा यादव को कोर्ट ने जेल भी भेजा था।
