April 16, 2026

Hind foucs news

hindi new update

बेवफाई के मामलों में कथित प्रेमी/प्रेमिका का सीडीआर और मोबाइल टावर लोकेशन मंगा सकती हैं अदालतें, दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला

नई दिल्ली। पति-पत्नी की बेवफाई की वजह बनने वाले तीसरे शख्स के बारे में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल खेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने कहा कि पति-पत्नी के बीच विवाद के मामले की जांच के लिए कोई भी कोर्ट उनके और कथित प्रेमी या प्रेमिका के मोबाइल कॉल डिटेल यानी सीडीआर और टावर लोकेशन डेटा मंगा सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने ये निर्देश दिया कि कथित प्रेमी या प्रेमिका की गोपनीयता के लिए इस डेटा और रिकॉर्ड को सीलबंद लिफाफे में देना होगा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच बेवफाई के विवाद में तीसरे व्यक्ति का डेटा परिस्थितिजन्य सबूत हो सकता है। ये आरोप को साबित या खारिज करने में मदद देता है। कोर्ट ने कहा कि कथित प्रेमी या प्रेमिका का ये डेटा और रिकॉर्ड एक निश्चित समयसीमा का होना चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सीडीआर और टावर लोकेशन के डेटा से पक्षों के बीच संपर्क का पैटर्न भी दिखता है और शारीरिक गतिविधियों का भी खुलासा होता है। इस वजह से फैमिली कोर्ट सुनिश्चित करे कि उसके निर्देश आनुपातिक और वैध कारणों वाले हों। कोर्ट ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 165 के तहत कोर्ट मामले से जुड़े तथ्य हासिल करने के लिए कोई भी कदम उठा सकते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में कथित प्रेमिका ने फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने संबंधित याचिकाकर्ता और पीड़ित महिला के पति का मोबाइल सीडीआर डेटा मंगाने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता युवती ने फैमिली कोर्ट के आदेश को निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। साथ ही कहा कि फैमिली कोर्ट के निर्देश जनवरी 2020 से एक तय अवधि का डेटा मंगाने का है। ये आरोप से सीधे जुड़ा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से साल 2003 के शारदा बनाम धर्मपाल मामले का उदाहरण दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में कहा था कि सच जानने के लिए निजता में सीमित दखल दिया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *