जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में लालू यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट से लगाई गुहार, एफआईआर रद्द करने की मांग
नई दिल्ली। जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में घिरे आरजेडी नेता और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई के द्वारा दायर, एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। लालू यादव के वकील ने दलील दी कि पीसी एक्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज करने से पहले मंजूरी लेना अनिवार्य था मगर सीबीआई ने ऐसा नहीं किया। इसलिए सीबीआई की प्राथमिकी को रद्द किया जाना चाहिए। हालांकि जस्टिस रविन्द्र डुडेजा ने मौखिक रूप से कहा कि मंजूरी न लेने की बात अगर मान ली जाए, तो यह केवल पीसी एक्ट के तहत अपराधों पर लागू होगी। अदालत ने केस की अगली सुनवाई के लिए 25 सितंबर की तारीख तय की है।
इससे पहले लालू यादव ने सुप्रीम कोर्ट से ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी, मगर सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट से मामले में तेजी से सुनवाई करने को कहा था। हालांकि लालू यादव की उम्र और उनके स्वास्थ्य को देखते हुए ट्रायल के दौरान उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पेशी से राहत दे दी थी। लैंड फॉर जॉब केस में लालू यादव के साथ उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, बेटी हेमा यादव और मीसा भारती भी आरोपी हैं।
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में 78 आरोपियों के नाम का जिक्र किया है। लालू यादव पर आरोप है कि यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में साल 2004 से 2009 के बीच जब वो केंद्रीय रेल मंत्री थे तब उन्होंने रेलवे में ग्रुप डी की नौकरियों में लोगों को भर्ती करने के बदले उनकी जमीन सस्ते दाम पर ले ली। जमीन हस्तांतरण के लिए एबी एक्सपोर्ट्स और एके इन्फोसिस्टम्स नाम की दो कंपनियों का इस्तेमाल हुआ। बाद में यह कंपनी लालू यादव के परिजनों के नाम ट्रांसफर हो गई।
