संचार सारथी एप को नए मोबाइल फोन में प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं, केंद्र सरकार ने वापस लिया फैसला
नई दिल्ली। संचार साथी ऐप को लेकर मचे घमासान के बीच केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन में पहले से इस ऐप को प्री-इंस्टॉल किए जाने का अपना आदेश वापस ले लिया है। इससे पहले केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि फोन में इस ऐप को रखना अनिवार्य नहीं है। यह यूजर्स की मर्जी पर निर्भर है। अगर किसी को अपने फोन पर संचार साथी ऐप नहीं चाहिए तो वो उसे डिलीट भी कर सकता है। इससे पहले विपक्षी दल और कुछ लोग ये आशंका जता रहे हैं कि केंद्र की मोदी सरकार इससे लोगों की नजरदारी करना चाहती है।
इस आशंका को संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को गलत बताया था। सिंधिया ने कहा था कि यूजर चाहे तो अपने मोबाइल में संचार साथी एप रखे या उसे डिलीट कर दे। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान पर विपक्षी दलों ने दूसरंचार विभाग के आदेश के 7(बी) बिंदु का मुद्दा बनाया था और सवाल उठाते हुए कहा था कि इसमें तो लिखा गया है कि यूजर संचार साथी एप को डिलीट नहीं कर सकता। इस पर अब सिंधिया का बयान आया है।
संचार मंत्री ने दूरसंचार विभाग की ओर से मोबाइल फोन निर्माताओं को संचार साथी एप देने के आदेश के 7(बी) बिंदु पर बताया कि इस बारे में पब्लिक डोमेन में अफवाहें हैं। उन पर मत जाइए। सिंधिया ने कहा कि 7(बी) ये नहीं कहता कि आप एप को अनइंस्टॉल नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि 7(बी) सिर्फ ये कहता है कि फोन में एप इंस्टॉल होना चाहिए। यूजर को इसे एक्सेस करने में रुकावट नहीं होनी चाहिए और इसे डिसेबल न किया जाए, ताकि यूजर संचार साथी एप का इस्तेमाल कर सके। संचार मंत्री ने कहा कि विभाग के आदेश का 7(बी) बिंदु यूजर्स के लिए नहीं, मोबाइल फोन निर्माताओं के लिए है। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद सिर्फ आम लोगों को फ्रॉड नाम के कैंसर से बचाना है।
संचार साथी एप वैसे यूजर्स के काफी काम का है। मोबाइल में संचार साथी एप डाउनलोड करने पर आप ये देख सकते हैं कि किसी और ने आपके नाम पर सिम तो नहीं लिया है। साथ ही आप फ्रॉड करने वालों के नंबर भी इसके जरिए रिपोर्ट कर सकते हैं। खोए या चोरी गए मोबाइल फोन को ब्लॉक करने का काम भी संचार साथी एप से हो सकता है। इसके अलावा मोबाइल फोन की जांच भी संचार साथी से की जा सकती है कि उसका आईएमईआई सही है या नहीं। दूरसंचार विभाग के मुताबिक संचार साथी एप पर मिली शिकायतों के आधार पर जनवरी से अक्टूबर 2025 तक देशभर में 50 हजार गुम या चोरी हुए मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
