एसआईआर कर रहे बीएलओ में से कई की मौत पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, राहत के लिए दिए ये अहम निर्देश
नई दिल्ली। कुछ राज्यों में वोटरों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम कर रहे कई बीएलओ की बीते दिनों अचानक मौत हुई और कई ने आत्महत्या की। इन बीएलओ की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए राहत देने के लिए कई निर्देश दिए हैं। एसआईआर पर सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच से कहा कि उनके पास 35 से 40 बीएलओ के जान गंवाने की जानकारी है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने चिंता जताते हुए कहा कि एसआईआर की कार्यवाही वैध प्रक्रिया है। इसे पूरा करना होगा। सीजेआई ने कहा कि अगर स्टाफ की कहीं कमी है, तो ये राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने एसआईआर वाले 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित क्षेत्रों की सरकारों और वहां के निर्वाचन आयोगों को निर्देश दिया है कि वे बीएलओ पर दबाव कम करने के वास्ते अतिरिक्त स्टाफ को तैनात करें। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि अगर कोई बीएलओ निजी कारण से एसआईआर करने में सक्षम नहीं, तो वो उचित कारण बताने पर उनको राहत देने पर चुनाव आयोग विचार करे और किसी अन्य को उस बीएलओ की जगह काम पर लगाया जाए। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ये भी कहा कि राहत न मिलने पर बीएलओ संबंधित कोर्ट भी जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से सौंपे गए वैधानिक कर्तव्य को टाला नहीं जा सकता। इन जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए प्रतिनियुक्त सरकारी कर्मचारी ड्यूटी करने के लिए बाध्य हैं।
बिहार में एसआईआर के दौरान किसी बीएलओ की अचानक मौत या आत्महत्या की कोई घटना नहीं हुई थी, लेकिन एसआईआर के दूसरे चरण में बंगाल और यूपी में कई बीएलओ ने या तो आत्महत्या कर ली या अचानक मौत हुई। इन बीएलओ के परिजनों का आरोप है कि वे बहुत दबाव में थे और एसआईआर पूरा करने में दिक्कत महसूस कर रहे थे। बीएलओ की मौत के मुद्दे को विपक्ष ने भी उठाया है और उसने चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने बीएलओ पर से दबाव कम करने के लिए एसआईआर की समयसीमा 7 दिन बढ़ाई है। पहले एसआईआर 4 दिसंबर को खत्म होनी थी। अब एसआईआर 11 दिसंबर को खत्म होगी और 19 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित की जाएगी।
