माणिकराव कोकाटे की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, विधानसभा सदस्यता रहेगी बरकरार
नई दिल्ली। भ्रष्टाचार मामले में घिरे महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे को अब सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिल गई है। शीर्ष अदालत ने कोकाटे की सजा पर रोक लगा दी है। नासिक की अदालत ने कोकाटे को दो साल की सजा सुनाई थी। इस वजह से कोकाटे को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उनकी विधायकी पर भी तलवार लटकने लगी थी। मगर अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कोकाटे की विधानसभा सदस्यता बरकरार रहेगी। इससे पहले शुक्रवार को ही बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोकाटे जो एक लाख ने बॉन्ड पर जमानत अर्जी मंजूर की थी।
इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की दोषसिद्धि पर फिलहाल इस हद तक रोक रहेगी कि उसके कारण विधानसभा की सदस्यता खत्म न हो। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया हे कि कोकाटे किसी भी प्रकार के लाभ के पद पर नहीं रह सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि वो फिलहाल मंत्री नहीं पाएंगे और न ही कोई सरकारी लाभ के पद पर आसीन हो सकेंगे। कोकाटे पर आरोप है कि सरकारी हाउसिंग स्कीम में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए घोषित 10 प्रतिशत कोटे का लाभ लेने के लिए उन्होंने झूठा हलफनामा दाखिल कर फ्लैट हासिल किया।
नासिक सत्र न्यायालय ने माणिकराव कोकाटे को इस मामले में दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था, जिसे उन्होंने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। वहां से जमानत मिलने के बाद उन्होंने सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। कोकाटे अजित पवार के गुट वाली एनसीपी के नेता हैं। वो महाराष्ट्र के नासिक जिले की सिन्नर विधानसभा सीट से पांच बार के विधायक हैं। कोकाटे फिलहाल स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं।
