क्या ब्लड देने के बदले रिप्लेसमेंट डोनेशन मांग सकते हैं अस्पताल?, झारखंड हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
रांची। आमतौर पर अस्पतालों में मरीज को ब्लड देने के बदले ब्लड डोनेशन कराने के लिए कहा जाता है। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अब झारखंड हाईकोर्ट ने शनिवार को ब्लड के बदले ब्लड रिप्लेसमेंट डोनेशन पर अहम फैसला सुनाया है। झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस एस. चंद्रशेखर और जस्टिस नवनीत कुमार की बेंच ने कहा है कि राज्य के किसी भी अस्पताल में ब्लड के बदले ब्लड रिप्लेसमेंट डोनेशन नहीं मांगा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ये प्रथा नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल के नियमों और नेशनल ब्लड पॉलिसी के खिलाफ है।
रांची की सामाजिक संस्था लाइफ सेवर्स ने झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि कई अस्पतालों में मरीजों के परिजनों से ब्लड के बदले उतना ही ब्लड डोनेशन कराने की शर्त रखी जाती है। जनहित याचिका में ब्लड रिप्लेसमेंट डोनेशन की शर्त को अवैध और अमानवीय कहा गया था। जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि ब्लड रिप्लेसमेंट डोनेशन की प्रथा से मरीज में संक्रमण फैलने का भी खतरा है। क्योंकि लोग जल्दबाजी में ब्लड डोनेट करते हैं। इससे खून की ठीक से जांच नहीं होती। जिससे डोनेट किए गए ब्लड में हेपेटाइटिस, एचआईवी जैसे खतरनाक संक्रमण हो सकते हैं।
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि ब्लड की जरूरत पूरी करने के वास्ते सभी अस्पतालों को ब्लड डोनेशन कैंप लगाने चाहिए। हाईकोर्ट ने झारखंड सरकार को भी निर्देश दिया कि वो सभी अस्पतालों में ब्लड डोनेशन कैंप लगवाए। साथ ही ब्लड के बदले ब्लड रिप्लेसमेंट को पूरी तरह खत्म करने के लिए भी झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है। सुनवाई के दौरान लाइफ सेवर्स के वकीलों ने कोर्ट से कहा कि नेशनल ब्लड पॉलिसी में साफ तौर पर स्वैच्छिक ब्लड डोनेशन की बात कही गई है। इसमें जबरन ब्लड रिप्लेसमेंट लेने का प्रावधान नहीं है। झारखंड हाईकोर्ट के अहम फैसले से राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती उन मरीजों को राहत मिली है, जिनके परिजनों को ब्लड देने के बदले ब्लड रिप्लेसमेंट के लिए कहा गया।
