ICGS समुद्र प्रताप को तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल किए जाने से गदगद हुए पीएम नरेंद्र मोदी, कहा-आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम
नई दिल्ली। भारतीय तटरक्षक जहाज (ICGS) समुद्र प्रताप की कमीशनिंग को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम करार दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ICGS समुद्र प्रताप हमारे सुरक्षा तंत्र को बढ़ावा देगा और पर्यावरण संरक्षण की स्थिरता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। समुद्र प्रताप भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण पोत है और तटरक्षक बेड़े का अब तक का सबसे बड़ा पोत भी है। 4,170 टन का वजन और 115 मीटर की लंबाई इसकी विशालता को दर्शाती है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दो दिन पहले ही समुद्र प्रताप को कमीशन किया है।
ICGS समुद्र प्रताप में उन्नत प्रदूषण जांच प्रणाली, समर्पित प्रदूषण प्रतिक्रिया नौकाएं और आधुनिक अग्निशमन क्षमता मौजूद है। इसके साथ ही इसमें हेलीकॉप्टर हैंगर और एविएशन सपोर्ट की सुविधा भी है, जिससे इसकी पहुंच और प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाती है। इन सारी क्षमताओं के कारण यह जहाज, विषम समुद्री परिस्थितियों में भी स्थिर काम कर सकता है। 22 नॉट्स की गति इसकी परिचालन शक्ति को बढ़ाती है। इस जहाज में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ता हुआ एक मजबूत कदम है। मेक इन इंडिया पहल का असली अर्थ, ऐसे ही प्रोजेक्ट्स में दिखाई देता है। इतने जटिल मंच में भी, इस लेवल की स्वदेशी सामग्री यह दिखाती है कि हमारा रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र, अब काफी उन्नत हो चुका है।
समुद्र प्रताप की कमीशनिंग
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समुद्र प्रताप की कमीशनिंग के अवसर पर कहा था कि यह भारत के उस भव्य समुद्री विजन से जुड़ा है, जो यह मानता है, कि समुद्री संसाधन किसी एक देश की संपत्ति नहीं बल्कि मानवता की साझा विरासत हैं और जब विरासत साझा होती है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी साझा होती है। यही कारण है, कि भारत आज शांति, स्थिरता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के सिद्धांतों के साथ विश्व पटल पर मजबूती से खड़ा दिखाई देता है।
