बांग्लादेश में जमात ए इस्लामी की हार और बीएनपी की जीत का भारत पर क्या होगा असर?
नई दिल्ली। बांग्लादेश चुनाव में जमात-ए-इस्लामी पार्टी की बुरी तरह से हार हुई है जबकि तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने बहुमत के साथ जीत दर्ज की। जमात के सेकंड इन कमांड माने जाने वाले बड़े नेता मियां गुलाम परवार भी खुलना-5 सीट से चुनाव हार गए हैं। वहीं भारत के कट्टर विरोधी मौलाना ममूनल हक को भी शिकस्त झेलनी पड़ी और वो अपनी ढाका 13 सीट को बचा नहीं पाए। जमात की हार और बीएनपी की जीत कहीं न कहीं भारत के लिए अच्छी खबर है।
दरअसल जमात ए इस्लामी को पाकिस्तान का पक्षधर माना जाता है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का प्रभाव जमात पर दिखता है। जमात हमेशा से ही भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने वाला रहा है। ऐसे में अगर जमात चुनाव जीत जाती तो ऐसे समय में जब भारत और बांग्लादेश के हालात पहले से तल्ख हैं दोनों के बीच तनाव और बढ़ जाता। बांग्लादेश से लगे भारत के सीमावर्ती राज्यों में सीमा पार से घुसपैठ के साथ कट्टरपंथी नेटवर्क की सक्रियता बढ़ सकती थी ऐसे में जमात का चुनाव हार जाना भारत के लिए कहीं न कहीं राहत की बात है।
हालांकि बीएनपी की बात करें तो पूर्व जब जब उसकी सरकार रही भारत के साथ रिश्ते तनावपूर्ण मगर अब जब तारिक रहमान 17 साल बाद वतन लौटे हैं और प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं तो ऐसा माना जा रहा कि नए सिरे से भारत के साथ रिश्तों की शुरुआत हो सकती है। बीएनपी सरकार के सामने देश के आर्थिक संकट से निपटना बड़ी चुनौती होगी ऐसे में संभावना है कि भारत के साथ टकराव के बजाय वह सहयोग के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाना चाहेगी। बांग्लादेश से रिश्ते खराब होने के बावजूद भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर खालिदा जिया के निधन पर बांग्लादेश गए थे और तारिक रहमान से मिलकर पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से शोक संदेश पत्र दिया था।
