याचिकाओं को तैयार करने में एआई के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, जानिए क्या हो रही गड़बड़ी?
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का आजकल बोलबाला है। एआई के जरिए कोडिंग, कुछ लिखना, जानकारी हासिल करना पलक झपकाने से भी तेजी से होता है, लेकिन एआई के दुरुपयोग की चिंता भी तमाम एक्सपर्ट जताते रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत समेत कई वरिष्ठ जजों ने याचिका का ड्राफ्ट बनाने में एआई के इस्तेमाल के खतरनाक ट्रेंड की ओर ध्यान दिलाते हुए चिंता जताई है।
सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाओं का ड्राफ्ट तैयार करने में वकीलों की ओर से एआई की मदद लिए जाने से हो रही अहम गड़बड़ियों पर चिंता जताई है। बार एंड बेंच के मुताबिक सीजेआई ने कहा है कि उनको चौंकाने वाली जानकारी दी गई है कि कुछ वकीलों ने याचिका का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एआई का इस्तेमाल शुरू किया है। सीजेआई ने ये भी कहा कि उनके ब्रदर जस्टिस दीपांकर दत्ता के साथ ऐसा हुआ कि जो याचिका दी गई, उसमें बताए गए उदाहरण थे ही नहीं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि मर्सी बनाम मानवता का एक केस आया, जिसमें दिए गए उदाहरण थे ही नहीं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग याचिका में सुप्रीम कोर्ट के असली केस बता रहे हैं, लेकिन जो हिस्सा दिया गया, वो फैसले में है ही नहीं।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कई याचिकाओं में एआई के इस्तेमाल से हो रही इन गड़बड़ियों को इसलिए पकड़ा जा सका है, क्योंकि याचिका पर सुनवाई करने से पहले जज उसे ध्यान से पढ़ते हैं। साथ ही याचिकाओं में कोर्ट के जिन फैसलों का उदाहरण दिया जाता है, उसे भी एआईआर मैनुअल से मिलाकर देखा जाता है। एआई एक अच्छी तकनीकी तो है, लेकिन अदालतों में दाखिल याचिकाओं में इसकी ओर से दिए गए गलत उदाहरण बड़ी गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं। अब सीजेआई सूर्यकांत समेत वरिष्ठ जजों की ओर से चिंता जताने के बाद माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट इस दिशा में कोई अहम कदम उठा सकता है।
