क्या है होलोकॉस्ट मेमोरियल ‘याद वाशेम’? पीएम नरेंद्र मोदी ने वहां जाकर अर्पित की श्रद्धांजलि, बेंजामिन नेतन्याहू भी रहे साथ
नई दिल्ली। इजरायल दौरे के दूसरे दिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी येरूशलम में होलोकॉस्ट मेमोरियल ‘याद वाशेम’ पहुंचे। यह मेमोरियल हिटलर के नाजी शासन में मारे गए 60 लाख यहूदियों की याद में बनाया गया है। पीएम मोदी ने होलोकॉस्ट पीड़ितों की निशानियों को देखा और उनको नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी पीएम मोदी के साथ रहे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर ने 60 लाख यहूदियों की हत्या करा दी थी। उस नरसंहार को ही होलोकॉस्ट कहा जाता है। उनकी याद में बनाए गए इस मेमोरियल का नाम ‘याद वाशेम’ रखा गया है जिसका अर्थ याद और नाम, मतलब जिन लोगों को खत्म की कोशिश की गई, उनकी याद हमेशा जिंदा रहे।
होलोकॉस्ट ग्रीक भाषा के दो शब्दों ‘होलोस’ और ‘काउस्टोस’ से मिलकर बना है। ‘होलोस’ का मतलब है संपूर्ण और ‘काउस्टोस’ का अर्थ होता है जला हुआ। इजरायल की संसद नेसेट ने साल 1953 में यह फैसला किया था कि होलोकॉस्ट में मारे गए यहूदियों की याद में एक विशेष स्मारक बनाया जाए। इसके बाद साल 2005 में येरूशलम में यह संग्रहालय खोला गया। इसका उद्देश्य यह है कि उस त्रासदी से जुड़ी घटनाओं और यहूदियों पर हुए अत्याचार को समझा जा सके।
इस संग्रहालय में असली दस्तावेज, तस्वीरों के साथ पीड़ितों की व्यक्तिगत कहानियां को संरक्षित कर रखा गया है। म्यूजियम में उन लोगों की तस्वीरें और उनके नाम लिखे हुए हैं जिनकी 1941 से 1945 के बीच हिटलर के शासन के दौरान बेरहमी से हत्या की गई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी के कब्जे वाले इलाके में यहूदियों के नरसंहार के लिए बड़े-बड़े कैंप बनाए गए थे, जहां सामूहिक तौर पर यहूदियों को जलाकर गैस चेंबर में डालकर मार डाला गया था। मरने वालों में दस लाख से ज्यादा बच्चे भी शामिल थे।
