अमेरिका के हमले में डूबे ईरान के जहाज ‘आईआरआईएस देना’ ने भारत से नहीं मांगी थी कोई मदद
नई दिल्ली। अमेरिका की पनडुब्बी ने श्रीलंका के करीब तारपीडो से हमला कर ईरान की नौसेना के जहाज ‘आईआरआईएस देना’ को डुबो दिया। जिसके बाद से भारत में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल हंगामा बरपा रहे हैं। कांग्रेस और विपक्षी दल ये आरोप लगा रहे हैं कि ईरान का जहाज भारत में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में आया था और इस नाते मेहमान था। विपक्षी दल ये सवाल उठा रहे हैं कि ईरानी जहाज को डुबोये जाने से बचाने के लिए मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया। ईरानी नौसेना के जहाज आईआरआईएस देना के बारे में अब सरकारी सूत्रों ने कहा है कि उसने 28 फरवरी के बाद भारत से किसी तरह की मदद नहीं मांगी थी। देखिए, आईआरआईएस देना पर अमेरिकी पनडुब्बी ने किस तरह हमला किया था।
हिंदुस्तान टाइम्स अखबार से सरकारी सूत्रों ने कहा कि आईआरआईएस देना ने विशाखापत्तनम में 16 से 25 फरवरी 2026 तक हुए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लिया था। जबकि, ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी से हमला शुरू किया था। सूत्रों के मुताबिक ईरान का जहाज आईआरआईएस देना 25 फरवरी को ही भारत की समुद्री सीमा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री इलाके में पहुंचा था। सूत्रों का ये भी कहना है कि ईरान का जहाज और उसका नाविक दल सिर्फ 16 फरवरी से 25 फरवरी तक ही भारत के मेहमान थे। साथ ही इस जहाज ने रवाना होने से पहले या बाद में भारत से किसी तरह की मदद नहीं मांगी थी।
ईरान की नौसेना के जहाज आईआरआईएस देना पर अमेरिका की वर्जीनिया क्लास की परमाणु ताकत से चलने वाली पनडुब्बी ने बुधवार 4 मार्च 2026 को तारपीडो से हमला किया था। ईरान के जहाज पर ये हमला श्रीलंका के गाले के करीब हुआ था। हमले की वजह से आईआरआईएस देना जहाज डूब गया और उसमें सवार नाविक दल के कम से कम 82 सदस्यों की मौत हुई। जबकि, श्रीलंका की नौसेना ने 32 को बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया। इस जहाज पर तैनात कई और नाविक अभी लापता बताए जा रहे हैं। जिनकी तलाश जारी है।
