संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए मोदी सरकार उठाएगी ये कदम!
नई दिल्ली। मोदी सरकार ने सितंबर 2023 में नारी वंदन एक्ट पास कराकर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने का रास्ता खोला था। एक्ट के तहत साल 2029 से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित होनी थी, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोदी सरकार अब इस आरक्षण को 2027 से ही लागू करना चाहती है। इसके लिए सरकार को संविधान संशोधन करना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार संविधान संशोधन के लिए विपक्षी दलों से सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस पहले ही महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग करती रही है।
नारी वंदन एक्ट को पास कराते वक्त मोदी सरकार ने कहा था कि जनगणना और परिसीमन के बाद इसे 2029 से लागू किया जाएगा। इस प्रक्रिया में अभी तीन साल लगेंगे। ऐसे में मोदी सरकार संविधान संशोधन के जरिए नारी वंदन एक्ट को अगले साल से ही लागू करने का मन बना रही है। साल 2027 में यूपी, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा के चुनाव हैं। अगर सरकार संविधान संशोधन करती है, तो इन चुनावों में नारी वंदन एक्ट लागू हो जाएगा। जिससे यूपी, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ जाएगी।
मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि परिसीमन बिना महिलाओं के लिए सीट आरक्षित करने के वास्ते विधानसभाओं की 33 फीसदी सीटों पर दोहरा प्रतिनिधित्व भी किया जा सकता है। यानी एक क्षेत्र में एक अलग सीट महिला के लिए होगी। नारी वंदन एक्ट लागू होने पर लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या बढ़कर 181 हो जाएगी। जबकि, राज्यसभा में महिला सांसदों की संख्या 80 के करीब होगी। अभी बहुत कम महिलाएं चुनकर संसद और विधानसभाओं में पहुंचती हैं। पार्टियां भी महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले चुनाव में कम टिकट देती हैं। नारी वंदन एक्ट लागू होने से पार्टियों को भी 33 फीसदी महिला प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाना होगा। इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के साथ ही उनका सशक्तिकरण भी होगा।
