उत्तराखंड मदरसा बोर्ड भंग, सीएम धामी बोले- नया सिलेबस न पढ़ाने वालों को बंद कराया जाएगा
हरिद्वार। उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के मदरसा बोर्ड को भंग करने का एलान किया है। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड से जुड़े मदरसों में जुलाई 2026 से उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड के सिलेबस को पढ़ाया जाएगा। सीएम धामी ने कहा है कि उत्तराखंड में जो भी मदरसे नए सिलेबस को लागू नहीं करेंगे, उनको बंद कर दिया जाएगा। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड की जगह धामी सरकार ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाया है। इसी से उत्तराखंड के सभी मदरसों को मान्यता लेनी होगी। साथ ही उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद में भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
उत्तराखंड के मदरसों में विज्ञान, गणित और अन्य भाषाओं की शिक्षा देकर छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए पुष्कर सिंह धामी सरकार ने इनमें नया सिलेबस लागू करने का फैसला किया है। अभी ये जानकारी नहीं है कि उत्तराखंड के मदरसों में बोर्ड का सिलेबस लागू होने के बाद धार्मिक और उर्दू-अरबी की शिक्षा दी जाएगी या नहीं। उत्तराखंड में अभी 452 मदरसों का रजिस्ट्रेशन है। देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जिलों में धामी सरकार ने 170 से ज्यादा मदरसों का रजिस्ट्रेशन न होने के कारण बंद करा दिया था। इसके अलावा अन्य मदरसों की जांच भी जारी है। बिना मान्यता वाले मदरसों को पूरी तरह बंद कराने का लक्ष्य धामी सरकार ने तय किया है।
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग किए जाने पर सियासत भी गर्माने के आसार हैं। वहीं, न्यूज चैनल आजतक के मुताबिक अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने मदरसा बोर्ड भंग किए जाने का समर्थन किया है। संतों की संस्था के अध्यक्ष रवींद्र पुरी का आरोप है कि मदरसा बोर्ड से देशविरोधी प्रवृत्तियां शुरू होती हैं। महंत ने मांग की है कि देशभर में मदरसों को खत्म कर उनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पढ़ाई कराई जानी चाहिए। उत्तराखंड से सटे यूपी के मदरसों में योगी आदित्यनाथ सरकार ने पहले ही आधुनिक विषय पढ़ाने का आदेश जारी किया था। योगी सरकार ने ही पहले अपने राज्य में मदरसों की जांच कराई थी। जिसमें 16000 के करीब मदरसे बिना रजिस्ट्रेशन के पाए गए थे।
