बंदर अब्बास पर हमले से भड़के ईरान का पलटवार, कुवैत में अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला
तेहरान। अमेरिकी नौसेना की ओर से बंदर अब्बास पर लगातार दूसरी बार हमला करने के बाद ईरान ने भी पलटवार किया है। ईरान की आईआरजीसी ने कहा है कि उसने अमेरिका के एक एयरबेस को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया है। कुवैत ने कहा है कि वो तमाम मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की कोशिश कर रहा है। खबर लिखे जाने तक ये पता नहीं चल सका है कि ईरान के हमले में कोई नुकसान हुआ या नहीं। ईरान के इस पलटवार से खाड़ी में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं।
इससे पहले अमेरिकी सेना ने बताया था कि उसने बुधवार रात बंदर अब्बास पर ईरान के एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया। बंदर अब्बास पर सोमवार की रात भी अमेरिकी नौसेना ने हमला बोला था। अमेरिका ने तब कहा था कि ईरान की नावें समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछा रही थीं। जिनको हमला कर नष्ट किया गया। वहीं, ताजा हमले के बाद अमेरिका ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के आवागमन को खतरा था। जहाजों पर ईरान हमले की तैयारी कर रहा था। जिसकी वजह से उसने बंदर अब्बास में ईरान के सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया। वहीं, ईरान का कहना है कि अमेरिका का तेल टैंकर जहाज रडार बंद कर होर्मुज पार करने की कोशिश कर रहा था। जिस पर फायरिंग कर उसे चेतावनी दी गई थी। जिसके बाद अमेरिका ने बंदर अब्बास पर हमला किया।
बंदर अब्बास ईरान के लिहाज से बहुत अहम है। ये उसके बड़े बंदरगाहों में शामिल है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान कर रखा है कि जब तक होर्मुज से जहाजों का निर्बाध आवागमन नहीं होता, ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी वो जारी रखेंगे। इस वजह से ईरान से तनातनी और बढ़ गई है। ईरान मांग कर रहा है कि अमेरिका नाकेबंदी खत्म करे और होर्मुज पर उसका आधिपत्य मान ले। वहीं, ट्रंप ने साफ कहा है कि होर्मुज सभी देशों का है और उस पर ईरान का अधिकार किसी सूरत में नहीं माना जाएगा। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच हमलों से खाड़ी में फिर युद्ध भड़कने की आशंका पैदा हो गई है। अमेरिका और ईरान में 39 दिन तक युद्ध चला था। जिसके बाद 8 अप्रैल को ट्रंप ने युद्धविराम का एलान किया था।
