यूसीसी बिल पारित करने वाला तीसरा राज्य बना असम, प्रदेश विधानसभा में पास हुआ विधेयक, जानिए इसके प्रमुख प्रावधान
नई दिल्ली। असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल पास हो गया है। इस बिल को लाने का सबसे प्रमुख उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार देना है। अब असम देश का तीसरा ऐसा राज्य बन गया है जहां विधानसभा में यूसीसी बिल पारित हुआ है। सबसे पहले उत्तराखंड और उसके बाद गुजरात में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित हुआ था। असम के संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने 25 मई को द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, बिल, 2026 को विधानसभा में पेश किया था, जिसे आज पारित कर दिया गया। हालांकि विपक्ष इस बिल के कई प्रावधानों का विरोध कर रहा है।
यूसीसी कानून के तहत अब किसी भी धर्म में एक से ज्यादा शादी गैरकानूनी होगी और ऐसा करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। साथ शादी के लिए लड़के की उम्र 21 वर्ष और युवती की उम्र 18 वर्ष तय की गई है इसका पालन करना अनिवार्य होगा। शादी या निकाह के 60 दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। वहीं तलाक का भी पंजीकरण कराना होगा। ऐसा न करने पर 10,000 का जुर्माना भरना पड़ेगा। जाली दस्तावेजों के जरिए विवाह पंजीकरण कराने पर तीन महीने तक की कैद या 25,000 तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इसके अलावा पैतृक संपत्ति और में महिलाओं को अब पुरुषों के बराबर अधिकार मिलेंगे। जो लोग लिव इन में रहते हैं उनको भी पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
असम सरकार ने आदिवासी समुदाय के लोगों को यूसीसी बिल के दायरे से बाहर रखा है। हालांकि इसको लेकर विपक्ष के कुछ नेताओं विशेषकर मुस्लिमों ने आपत्ति जताई हे। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम के हालातों के आधार पर हमने यूसीसी बिल बनाया है। इस बिल पर राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यहां कानून बनेगा और लागू होगा। इस कानून के लागू होने के दौरान अगर ऐसा महसूस हुआ कि इसमें कुछ संशोधन करना चाहिए तो वे जरूर होगा। सीएम बोले, मुझे नहीं लगता है कि इसे लागू करने में कोई परेशानी आएगी।
