असम में 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों का नहीं बनेगा आधार, हिमंत बिस्वा सरमा कैबिनेट का फैसला
नई दिल्ली। असम सरकार ने राज्य में घुसपैठ पर लगाम लगाने और घुसपैठियों की पहचान के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कैबिनेट में लिए गए निर्णय के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि अब प्रदेश में 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को आधार कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। इसके पीछे कारण यह है कि इससे यह पक्का किया जा सके कि कोई भी अवैध प्रवासी किसी प्रकार से आधार जैसे अहम दस्तावेज को हासिल न कर सके।
कैबिनेट की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री हिमंत ने कहा कि विशेष मामलों में, जिला कमिश्नर को आधार कार्ड जारी करने की मंजूरी लेने के लिए राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजना होगा। इसके बाद सरकार तय करेगी कि आवेदक को आधार कार्ड जारी किया जाना चाहिए या नहीं। यह बताते हुए कि कुछ जिलों में आधार कार्ड जारी करने का काम सैचुरेशन प्वाइंट तक पहुंच गया है, सीएम सरमा ने कहा, कुछ जिलों में यह आंकड़ा 100 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गया है और हमें यह पता लगाना होगा कि ये कौन लोग हैं जो अतिरिक्त आधार कार्ड ले रहे हैं।
चाय बागान समुदाय, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति समुदाय और दिव्यांग लोगों को फिलहाल आधार कार्ड जारी किए जाते रहेंगे। हालांकि इन लोगों को आधार कार्ड बनवाने संबंधी यह छूट हमेशा के लिए नहीं रहेगी। अगले साल 1 अप्रैल, 2027 से के बाद इन समुदायों के 18 साल से ज्यादा के लोगों के भी आधार बनने बंद हो जाएंगे। सरकार के इस फैसले का असर 18 साल से कम उम्र के लोगों पर नहीं पड़ेगा। उनके आधार पहले की तरह आगे भी बनते रहेंगे। बता दें कि असम, बंगाल समेत बांग्लादेश के सीमावर्ती राज्यों में घुसपैठ एक बड़ी समस्या है जिस पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए मोदी सरकार कई कदम उठा रही है।
