महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का समर्थन करने के लिए अखिलेश यादव ने रखी शर्त, क्या समाजवादी पार्टी में टूट की अटकलों का असर?
नई दिल्ली। लोकसभा में 37 और राज्यसभा में 4 सांसदों वाली समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अब महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को समर्थन देने का संकेत दे रहे हैं। अखिलेश यादव ने बीते संसद सत्र के दौरान इन बिलों का समर्थन करने से मना कर दिया था। अब अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को समर्थन देने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। परिसीमन बिल को पास कराने के लिए मोदी सरकार को संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए। ऐसे में अगर वो अखिलेश यादव के प्रस्ताव पर राजी होती है, तो दोनों बिल पास कराने में आसानी होगी।
खास बात ये भी है कि बीते दिनों अटकलों का बाजार गर्माया था कि ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे की पार्टी के बाद अखिलेश यादव की पार्टी के भी सांसद और विधायक टूटेंगे। योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने इसका दावा भी किया था। सवाल ये है कि क्या अखिलेश पर इन अटकलों का असर पड़ा है? बहरहाल, अखिलेश यादव की शर्त है कि 33 फीसदी महिला आरक्षण को 2027 के यूपी और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों से ही लागू किया जाए। इसके अलावा परिसीमन बिल के जरिए राज्यसभा और विधान परिषदों में सीटें बढ़ाने, पिछड़े और अल्पसंख्यक मुस्लिम महिलाओं के उचित प्रतिनिधित्व की भी उन्होंने मांग की है। पेच इसी मुस्लिम महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर फंस सकता है। क्योंकि बीजेपी का कहना है कि धार्मिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। भारत के संविधान में धार्मिक आधार पर आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में देखना है कि क्या मोदी सरकार और अखिलेश यादव एक-दूसरे की ओर कदम बढ़ाते हैं या नहीं।
गौर करने की बात है कि तीन महीने पहले ही संसद के पिछले सत्र में जब महिला आरक्षण और परिसीमन बिल आया था, तब पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन में अखिलेश यादव को मित्र बताकर कहा था कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष कभी-कभी हमारी मदद कर देते हैं। इसके बावजूद अखिलेश यादव ने उस वक्त दोनों अहम बिलों का पक्ष लेने से साफ इनकार कर दिया। अब अखिलेश यादव इस बिल के पक्ष में आते दिख रहे हैं। ऐसे में संसद के मॉनसून सत्र में अगर मोदी सरकार फिर महिला आरक्षण और परिसीमन बिल लाती है, तो सियासी नजारा देखने वाला होने की पूरी संभावना है।
