महाराष्ट्र में भी लागू होगा यूसीसी, शीतकालीन सत्र में बिल पास कराएगी देवेंद्र फडणवीस सरकार
मुंबई। उत्तराखंड, असम, गुजरात और पश्चिम बंगाल के बाद अब महाराष्ट्र की बीजेपी नीत एनडीए सरकार ने भी समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का फैसला किया है। महाराष्ट्र सरकार ने यूसीसी बिल तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है। जस्टिस रंजना देसाई ने ही उत्तराखंड, गुजरात और असम में यूसीसी कानून का बिल तैयार किया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने भी जस्टिस देसाई को ही यूसीसी बिल तैयार करने का जिम्मा दिया है।
यूसीसी कानून बनाने के बारे में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवसी ने गुरुवार को महाराष्ट्र विधानसभा में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूसीसी पर कमेटी छह महीने में रिपोर्ट देगी। उसके सुझावों पर विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यूसीसी बिल पास कराकर उसे महाराष्ट्र में लागू किया जाएगा। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के अलावा कमेटी में हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस आरसी चव्हाण और जस्टिस एसजी मेहारे, महाराष्ट्र के पूर्व चीफ सेक्रेटरी डीके जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, संविधान विशेषज्ञ रमेश पतंगे और शिक्षाविद सुवर्णा रावल को भी शामिल किया गया है।
बता दें कि यूसीसी के मसले पर एक तरफ समर्थन करने वाले लोग हैं। वहीं, मुस्लिम संगठनों के नेता और धर्मगुरु यूसीसी का विरोध कर रहे हैं। मुस्लिम नेताओं और धर्मगुरुओं का कहना है कि यूसीसी इस्लाम के नियमों के खिलाफ है। इसलिए संविधान के तहत मिली धार्मिक आजादी को ध्यान में रखते हुए यूसीसी लागू नहीं होना चाहिए। वहीं, बीजेपी का कहना है कि संविधान के ही नीति निर्देशक तत्व में लिखा है कि सरकार यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम उठाएगी। गोवा में पुर्तगाली शासन के दौर से ही यूसीसी लागू है। जहां इसका कोई विरोध नहीं करता। यूसीसी के तहत आदिवासियों को छोड़कर अन्य सभी समुदायों के लिए शादी, तलाक, प्रॉपर्टी पर अधिकार समेत अन्य सभी प्रावधान एक जैसे लागू होते हैं। जबकि, मुस्लिमों में तलाक, शादी, प्रॉपर्टी पर अधिकार और गोद लेने की अलग प्रथा है।
