क्या वोटर लिस्ट में नाम न होने पर अपने आप खत्म होती है भारत की नागरिकता?, जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
नई दिल्ली। क्या वोटर लिस्ट में नाम न होने पर नागरिकता अपने आप खत्म हो जाती है? सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि ऐसा नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नागरिकता तय करने का चुनाव आयोग को कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी यही बात कह चुका है। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव आयोग का अधिकार सिर्फ वोटर लिस्ट की नियंत्रित करने और उसका पर्यवेक्षण तक ही है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि नागरिकता तय करने के कानून और चुनाव आयोग के अधिकार के संबंध में बने कानून में कोई भ्रम की स्थिति नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर ट्रिब्यूनल फैसला देता है कि किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ा जाए, तो चुनाव आयोग को उस व्यक्ति की नागरिकता तय करने का मामला संबंधित मंत्रालय को भेजना होगा। बता दें कि नागरिकता तय करने का काम गृह मंत्रालय का है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में दाखिल एक याचिका की सुनवाई भी करने का फैसला किया है।
इस याचिका में पश्चिम बंगाल में हुई एसआईआर की विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी मांगने की अपील की गई है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 25 अगस्त को सुनवाई करेगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति ने याचिका दी थी कि एसआईआर में उसका नाम वोटर लिस्ट से कट गया। उसने ट्रिब्यूनल में अपील की है, लेकिन उसका राशन कार्ड रद्द कर दिया गया है।
सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने उस व्यक्ति से कलकत्ता हाईकोर्ट जाने के लिए कहा था। सीजेआई ने याचिकाकर्ता को भरोसा दिलाया था कि कलकत्ता हाईकोर्ट उसकी समस्या जरूर दूर करेगा। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों गुवाहाटी हाईकोर्ट के उन 28 फैसलों को रद्द कर दिया था। जिनके तहत असम के 27 लोगों को भारतीय नागरिक नहीं माना गया था। सभी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनको जवाब देने का मौका नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर ट्रिब्यूनल को फिर से सभी के मामले सुनने के लिए कहा था।
