ईरान के सैन्य ऑपरेशन सेंटर, ड्रोन स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स पर अमेरिका का हमला, इस्लामी देश ने भी कुवैत और बहरीन में किया पलटवार
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच शांति दूर-दूर तक नहीं दिख रही। अमेरिका ने जहां मंगलवार को भी ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बमबारी की। वहीं, ईरान ने भी कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। ईरान की सेना ने होर्मुज में भी एक जहाज पर हमला किया। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर कहा है कि ईरान से बातचीत नहीं करेंगे। ट्रंप ने ये संकेत भी दिया कि अमेरिकी सेना अब ईरान के यूरेनियम संवर्धन संयंत्रों के करीब भी हमले कर सकती है।
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने ईरान पर 11वीं रात हमलों के बाद कहा कि तीन महीने में ईरान ने होर्मुज में 30 से ज्यादा जहाजों पर हमले किए हैं। इन हमलों से इन जहाजों के नाविकों की जान को खतरे के साथ ही समुद्र के जरिए कारोबार पर भी असर पड़ा। सेंट्रल कमांड के मुताबिक ताजा हमलों में ईरान के ड्रोन स्टोरेज, विमानों के हैंगर, सैन्य ऑपरेशन सेंटर, लॉजिस्टिक्स और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया गया। जिनका मकसक ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना था। जिससे होर्मुज में जहाजों के लिए खतरा कम किया जा सके।
इस बीच, न्यूज एजेंसी एपी का दावा है कि ईरान के साथ सैन्य संघर्ष में अब तक 500 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के आंकड़ों से ये ज्यादा है। ईरान से संघर्ष में अब तक अमेरिका के 16 जवानों की जान भी गई है। बीते दिनों ही बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हमले में दो जवान मारे गए थे और एक लापता हो गया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि ईरान को परमाणु कार्यक्रम बंद करना और होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों के लिए खोलना होगा। वहीं, ईरान का कहना है कि संघर्ष तभी रुकेगा, जब अमेरिका शांति समझौते के एमओयू की शर्तों का पालन करेगा। दोनों पक्षों के अपने रुख पर अड़े रहने की वजह से होर्मुज से जहाजों का आना-जाना बंद हो चुका है। जिससे कच्चे तेल की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है।
