कौन हैं झंडू कुमार? ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को दिलाया पहला पदक, संघर्षों भरा रहा है जीवन
नई दिल्ली। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने देश के लिए पहला पदक जीता है। 28 वर्षीय पैरा एथलीट झंडू कुमार ने पुरुषों के हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग के 72 किलो वर्ग में 190 किलोग्राम वजन उठाकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। पदक जीतने के बाद झंडू कुमार ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि हवा में उड़ा रहा हूं। ये मेरा पहला मेडल है। दिमाग में यही चल रहा था कि मेडल जीतना है। उन्होंने अपने कोच, परिवारजनों और समर्थकों का आभार जताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार सीएम सम्राट चौधरी ने झंडू कुमार को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी है। मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले झंडू कुमार का जीवन बहुत ही संघर्षों भरा रहा है। गरीबी से जूझते हुए और पोलियो ग्रस्त होने के बावजूद उन्होंने यह दिखा दिया कि अगर इंसान सही मायने में कुछ करने की ठान ले और उसके लिए जी जान लगा दे तो उसे एक दिन सफलता जरूर मिलती है।
झंडू कुमार को पांच साल की उम्र में पोलियो हो गया था जिसके चलते उनका पैर खराब हो गया। घर चलाने के लिए उन्होंने सब्जी बेची, ई-रिक्शा चलाया। यहां तक कि 2023 में उन्होंने राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने के लिए उनको अपना ई-रिक्शा तक बेचना पड़ा लेकिन उस वक्त किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। इसके बावजूद झंडू कुमार ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। नेशनल चैंपियनशिप के दौरान झंडू कुमार भारत के पूर्व पैरा पावरलिफ्टर और राष्ट्रीय कोच राजिंदर सिंह राहेलू की नजर में आ गए। उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के गांधीनगर स्थित नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में झंडू को ट्रेनिंग का मौका दिया और यहीं से उनके करियर को दिशा मिल गई।
पीएम नरेंद्र मोदी ने दी बधाई
पीएम मोदी ने झंडू कुमार की इस उपलब्धि को उनकी जबरदस्त ताकत, अटूट संकल्प और सालों की अनुशासित मेहनत का बेहतरीन उदाहरण बताया है। मोदी बोले, हर चुनौती का सामना करते हुए इंटरनेशनल मंच पर शानदार प्रदर्शन करके, झंडू कुमार ने पूरे देश का मान बढ़ाया है और अनगिनत भारतीयों को प्रेरित किया है।
