एच1बी और एल-1 वीजा एक्सटेंशन फीस बढ़ाने की तैयारी में ट्रंप प्रशासन, भारतीयों के लिए होगी दिक्कत
वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अमेरिकी सरकार लगातार वीजा नियमों में बदलाव कर रही है। अब ताजा खबर है कि ट्रंप प्रशासन एच1बी वीजा के एक्सटेंशन की फीस के लिए नया नियम बना रहा है। एच1बी वीजा एक्सटेंशन फीस का नया नियम भारतीयों के लिए दिक्कत का सबब बनना तय है। खबर के मुताबिक एच1बी के साथ ही एल-1 वीजा के एक्सटेंशन की फीस को ज्यादा करने की तैयारी है। इससे अमेरिका की कंपनियों को विदेशी कामगारों को रखना महंगा पड़ेगा।
अमेरिका की सरकार विदेशी कामगारों को 3 साल के लिए एच1बी वीजा देती है। अगर इस वीजा का धारक आगे भी अमेरिका में काम करता रहता है, तो उसका एक्सटेंशन कराना होता है। एल-1 वीजा को भी समयसीमा के बाद एक्सटेंड कराने की जरूरत होती है। एच1बी और एल-1 वीजा एक्सटेंशन के लिए फीस में बढ़ोतरी होने पर विदेशी कामगारों को रखने वाली अमेरिकी कंपनियों को हजारों डॉलर अतिरिक्त चुकाने होंगे। जानकारी के मुताबिक अमेरिका के होमलैंड सुरक्षा विभाग, श्रम विभाग और विदेश विभाग ने जुलाई में प्रस्ताव दिया था कि एच1बी और एल-1 वीजा के एक्सटेंशन की फीस में बढ़ोतरी की जाए। माना जा रहा है कि इस महीने के अंत या सितंबर की शुरुआत में फीस बढ़ोतरी लागू हो सकती है।
अब तक एच1बी वीजा के एक्सटेंशन के लिए 4000 डॉलर और एल-1 वीजा के लिए 4500 डॉलर देने होते हैं। एच1बी वीजा एक्सटेंशन फीस में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर ही पड़ेगा। अमेरिकी सरकार के सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में जितने एच1बी वीजा रिन्यूअल हुए, उनमें भारतीयों की संख्या 226359 यानी 77.6 फीसदी रही। जबकि, 31581 यानी 10.8 फीसदी के साथ चीन दूसरे नंबर पर था। इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन नए एच1बी और एल-1 वीजा देने की राह मुश्किल बना चुका है। दरअसल, ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका के लोगों को ही वहां की कंपनियां नौकरी दें, लेकिन इन कंपनियों के लिए भारतीय और दूसरे देशों के कामगारों को रखना फायदे का सौदा होता है। क्योंकि अमेरिकी के मुकाबले भारतीय, चीन, दक्षिण कोरियाई कर्मचारी को कम तनख्वाह देनी होती है।
