सपा के पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक को भाई और 8 अन्य समेत उम्रकैद, औरैया में दोहरे हत्याकांड में कोर्ट ने ठहराया दोषी
औरैया। यूपी के औरैया स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट ने जिले में हुए दोहरे हत्याकांड में बुधवार को समाजवादी पार्टी के पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके पूर्व ब्लॉक प्रमुख भाई संतोष पाठक और 8 अन्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। औरैया में वकील मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा की छह साल पहले हत्या हुई थी। इस मामले में एक आरोपी नाबालिग था। जिसका केस जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड देख रहा है।
औरैया पुलिस के मुताबिक कमलेश पाठक और वकील मंजुल चौबे कभी दोस्त थे। पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास करीब 1 बीघा जमीन के सिलसिले में विवाद था। जमीन का विवाद समाजवादी पार्टी के एमएलसी रहे कमलेश पाठक और मंजुल चौबे के बीच बढ़ता गया। पुलिस के मुताबिक सपा के नेता कमलेश पाठक इस जमीन पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। जबकि, मंजुल इसके विरोध में थे। दोनों के बीच रंजिश हो गई। वारदात वाले दिन कमलेश पाठक विवादित जमीन पर बैठे थे। वहां, मंजुल चौबे के पिता पहुंचे और कहासुनी हुई। इसके बाद कमलेश के भाई संतोष और रामू भी वहां पहुंचे। जबकि, मंजुल के परिवार के लोग भी मौके पर पहुंच गए।
इसके बाद दोनों पक्षों में मारपीट हुई और फिर फायरिंग की गई। मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा को गोली लगी और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। पुलिस ने कमलेश पाठक और उनके भाइयों समेत कई लोगों पर केस दर्ज कर गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक मंजुल चौबे छात्र राजनीति से जुड़े थे। वो तिलक डिग्री कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। फिर 2006 के नगर पालिका चुनाव में कमलेश पाठक और मंजुल में मतभेद होने लगे। मंजुल चौबे बीजेपी के नेताओं के करीबी बने। वहीं, कमलेश पाठक 28 साल में सपा के टिकट पर विधायक बने। फिर 1990 में एमएलसी बने। इसके बाद वो 1991 में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री भी बनाए गए। कमलेश 2002 में दिबियापुर सीट से फिर विधायक बने। फिर चुनाव हारते गए। सपा ने 2015 में उनको दोबारा एमएलसी बनाया।
