नेपाल त्रासदी में 288 भारतीय अभी भी लापता, एमईए ने दिया अपडेट, चीन की तरफ भी फंसे हैं 200 मानसरोवर यात्री
नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण जलप्रलय के बाद राहत और बचाव का काम जारी है। मृतकों का आंकड़ा 195 पहुंच गया है और लगभग 1000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इन लापता लोगों में बहुत से भारतीय नागरिक भी हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल के हालात पर अपडेट देते हुए बताया है कि 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें 73 भारतीय नागरिक शामिल हैं जो त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारतीय मानसरोवर यात्रियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कई भारतीय अभी चीन की तरफ फंसे हुए हैं। बीजिंग में हमारा दूतावास उन्हें सुरक्षित निकालने की पूरी कोशिश कर रहा है। वहां लगभग 200 भारतीय नागरिक हैं जिन्होंने सुरक्षित निकलने के लिए हमसे मदद मांगी है। इनमें से 95 लोग दारचेन में हैं और अभी नेपाल में दाखिल होने के लिए हिल्सा की ओर बढ़ रहे हैं। चार लोग जीलोंग शहर में हैं, 13 ज़ुटुलपुक में हैं और सागा शहर की ओर जा रहे हैं, जबकि 60-70 लोग भी सागा की तरफ बढ़ रहे हैं। हमारा मिशन स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और वे उन्हें बचाने और सुरक्षित निकालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
प्रवक्ता जायसवाल ने बताया कि भारत की ओर से नेपाल में मदद भेजी जा रही है। विदेश मंत्रालय में भारतीयों की सहायता के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया है, जो चौबीसों घंटे काम करेगा। काठमांडू और बीजिंग, दोनों जगहों पर हमारे दूतावासों ने भी 24/7 हेल्पलाइन शुरू की हैं। हम उन राज्य सरकारों के भी संपर्क में हैं जहां से लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए हैं। जायसवाल ने पत्रकारों से कहा कि फिलहाल हमारे पास मौतों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जैसा कि मैंने कहा, वहां हालात लगातार बदल रहे हैं। जैसे ही हमें और जानकारी मिलेगी, हम आपके साथ साझा करेंगे
