योग दिवस के बाद भारत की एक और पहल रंग लाई, संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया
नई दिल्ली। भारत की पहल पर पहले संयुक्त राष्ट्र ने हर साल 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया था। अब भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह को पूरी तरह खत्म करने का अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित किया है। बता दें कि 27 नवंबर 2024 को मोदी सरकार ने ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान शुरू किया था। बाल विवाह के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस का प्रस्ताव सिएरा लियोन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया। जिसे 67 देशों ने समर्थन दिया।
संयुक्त राष्ट्र की ओर से 27 नवंबर को बाल विवाह के खिलाफ दिवस मनाने से ऐसे मामलों के खिलाफ दुनियाभर में जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही बाल विवाह कराने वालों और इसे शह देने वालों पर दुनियाभर में कार्रवाई भी हो सकेगी। बाल विवाह को खत्म करने की पहल सतत विकास लक्ष्य 5 के 5.3 बिंदु से भी संबंधित है। इस बिंदु में बाल विवाह और जबरन विवाह जैसी प्रथाओं को खत्म करने की प्रतिबद्धता जताई गई है। मोदी सरकार ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान छेड़कर बड़े स्तर पर जनता को जागरूक किया। लोगों को बाल विवाह की गलत प्रथा को मिटाने के लिए सामूहिक संकल्प भी दिलाया गया।
जेआरसी नाम की संस्था ने अपील की है कि साल 2030 तक दुनियाभर में बाल विवाह खत्म करने के लिए सरकारें ठोस कदम उठाएं। संस्था के मुताबिक हर बच्चे की शिक्षा, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करना जरूरी है। ताकि वो पूरी क्षमता हासिल कर सके। संस्था के भुवन ऋभु ने सिएरा लियोन के राष्ट्रपति की पत्नी डॉ. फातिमा मादा बायो के इस दिशा में योगदान को सराहा है। उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ दिवस के प्रस्ताव को समर्थन देने के लिए 67 देशों को धन्यवाद भी दिया। दुनिया में अब भी कई देशों में बाल विवाह प्रचलित है। नाइजर में 18 साल से कम उम्र की करीब 76 फीसदी लड़कियों की शादी होती है। मध्य अफ्रीकी गणराज्य और चाड में बाल विवाह की दर 61 फीसदी, माली में 54 फीसदी है। लैटिन अमेरिका और कैरिबियन देशों में भी 21 से 25 फीसदी बाल विवाह होते हैं। भारत, बांग्लादेश और नेपाल में भी बाल विवाह की घटनाएं होती हैं, लेकिन अब इनमें कमी आई है।
