सीबीएसई के छठी क्लास के मौजूदा स्टूडेंट्स को थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से मिल सकती है छूट, सुप्रीम कोर्ट ने विचार करने को कहा
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में फिर से सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सीबीएसई से सवाल किया कि छठी कक्षा के मौजूदा स्टूडेंट्स को तीन भाषा नीति से राहत क्यों नहीं दी जा सकती जबकि सातवीं से दसवीं क्लास तक के बच्चों को छूट दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से इस पर विचार करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि एकेडमिक ईयर के बीच में यह पॉलिसी अचानक नहीं लाई जानी चाहिए।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, अगले साल से छठी क्लास के बच्चों के लिए इसे लागू किया जा सकता है। ताकि सभी लोग इसे समझ सकें, इसके लिए बच्चे मानसिक रूप से तैयार हो जाएं और उनको थोड़ा समय भी मिल जाए। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीएसई मौजूदा शैक्षणिक सत्र में भी छात्रों को स्वेच्छा से 3-भाषा पॉलिसी चुनने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दलील देते हुए कहा कि क्लास 6 के स्टूडेंट्स को 4 साल बाद 10वीं में बोर्ड परीक्षा देनी है, इसलिए उन्हें अभी से तीन भाषा की तैयारी करनी होगी।
गौरतलब है कि सीबीएसई ने 1 जुलाई 2026 से कक्षा 6 से तीन भाषा फॉर्मूला लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत इस साल से सीबीएसई में 6वीं क्लास से एक विदेशी और दो भारतीय भाषाओं को अनिवार्य किया है। अंग्रेजी के अलावा स्टूडेंट्स को दो अन्य भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी। अंग्रेजी को विदेशी भाषा में रखा गया है। इसके साथ ही 7वीं, 8वीं और 9वीं क्लास में पढ़ रहे मौजूदा बैच के स्टूडेंट्स जब 10वीं कक्षा में जाएंगे तो उनको तीसरी भाषा में बोर्ड परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी। उनका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा।
