ग्राहम स्टेंस हत्याकांड के दोषी दारा सिंह की समय से पहले रिहाई याचिका ओडिशा सरकार ने खारिज की, जानिए अब सुप्रीम कोर्ट का रुख
नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटों की हत्या में दोषी रवींद्र कुमार उर्फ दारा सिंह की समय से पहले रिहाई को ओडिशा के समीक्षा बोर्ड ने खारिज कर दी है। ओडिशा सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मनोज मिश्र और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच को ये जानकारी दी। ओडिशा सरकार के वकील ने कहा कि 31 अगस्त को दारा सिंह की सजा कम करने की अर्जी खारिज करने का आदेश जारी हुआ है। दारा सिंह उम्रकैद की सजा मिली थी। दारा सिंह ने सजा में छूट की अर्जी दी थी।
ओडिशा सरकार की ओर से जानकारी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की याचिका पर तीन हफ्ते के लिए सुनवाई टाल दी। सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह को अपनी रिट याचिका में सजा पर छूट न मिलने के आदेश को चुनौती देने के लिए उचित संशोधन याचिका दाखिल करने की मंजूरी दी है। ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटों की हत्या की घटना 22 जनवरी 1999 को ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में हुई थी। सीबीआई ने जांच के बाद बताया था कि दारा सिंह के नेतृत्व वाली भीड़ ने उस गाड़ी में आग लगा दी थी, जिसमें ग्राहम स्टेंस और उनके बेटे सो रहे थे। ग्राहम स्टेंस ओडिशा के आदिवासी इलाकों में ईसाई धर्म का प्रचार करते थे।
सुप्रीम कोर्ट में दारा सिंह की याचिका पर पहले भी दो बार सुनवाई टली थी। उस वक्त ओडिशा सरकार ने कहा था कि दारा सिंह की समय से पहले रिहाई की याचिका पर सरकार ने अभी फैसला नहीं लिया है। बीती सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर अगली तारीख तक फैसला न हुआ, तो वो ओडिशा के सचिव को तलब कर स्पष्टीकरण मांगेगा। दारा सिंह ने साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर समय से पहले रिहाई की अपील की थी। दारा सिंह की दलील है कि वो 25 साल से ज्यादा जेल में बिता चुका है। इसमें ओडिशा की नीति का हवाला दिया गया था कि जिन कैदियों की मौत की सजा उम्रकैद में बदली गई हो और जिन्होंने 25 साल जेल में बिताए, उनकी समय से पहले रिहाई पर विचार हो सकता है। साल 2003 में दारा सिंह को मौत की सजा सुनाई गई थी। ओडिशा हाईकोर्ट ने इसे उम्रकैद में बदला और फिर सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में इसकी पुष्टि की थी।
