April 26, 2026

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कोरोना काल में हिंदी फिल्मों को पछाड़ साउथ ने किया सबसे बड़ा कारोबार, बॉक्स ऑफिस में बढ़ी हिस्सेदारी

नई दिल्ली। कई दशकों से मनोरंजन कराने का सबसे सशक्त साधन फिल्में ही रही हैं, फिर चाहें बॉलीवुड हो, हॉलीवुड हो, या साउथ इंडिया फिल्म इंडस्ट्री, टॉलीवुड हो, लेकिन बीते कुछ सालों से खासकर कोरोना काल से तेलुगू फिल्में इस मामले में सबसे आगे रही हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने सिनेमा की जगह ले ली और दर्शकों तक फिल्में आसानी से पहुंचने लगी। एक रिपोर्ट में सामने आया है कि पिछले कुछ सालों से हिंदी और अन्य भाषाओं के मुकाबले तेलुगू फिल्में दर्शकों के द्वारा ज्यादा पसंद की गईं हैं। हाल ही में आई अल्लू अर्जुन स्टारर फिल्म पुष्पा (तेलुगू) वर्ष 2020—2021 में तान्हाजी (हिंदी) के बाद दूसरी सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। रिपोर्ट में ये भी पता चला है कि वर्ष 2020 और 2021 में बॉक्स-ऑफिस की कमाई में तेलुगू सिनेमा की हिस्सेदारी में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। अब ये हिस्सेदारी बढ़कर 29 प्रतिशत हो गई है, जबकि हिंदी सिनेमा की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत और तमिल की 17 प्रतिशत है।

मिली जानकारी के अनुसार, बॉक्स ऑफिस में चार दक्षिण भारतीय भाषाओं तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ भाषा का योगदान 2020-21 में बढ़कर 59  प्रतिशत तक हो गया है, जो कि साल 2019 में केवल 36 प्रतिशत था। वहीं हिंदी सिनेमा की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत से घटकर केवल 27 प्रतिशत रह गई है। रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि कोरोना के लॉकडाउन के चलते सिनेमाघरों के लंबे समय तक बंद रहने से फिल्म उद्योग पर बुरा असर पड़ा है। किसी भी फिल्म की कमाई में दो-तिहाई हिस्सा बॉक्स आफिस का शामिल होता है। साल 2020 और 2021 की बॉक्स ऑफिस की कुल कमाई, 2019 में हुई 11,000 करोड़ की कमाई, घट कर महज 5,757 करोड़ रुपये रह गई।

रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है, कि बीते कुछ सालों से बॉक्स ऑफिस की सबसे बड़ी भाषा हिंदी की बजाय तेलुगू रही है। हिंदी किसी अन्य भाषा की तुलना में करीब 8 से 10 गुना अधिक लोगों द्वारा बोली और देखी जाती है, इसलिए हिंदी फिल्मों को रिलीज करने के लिए देश के कई राज्यों में सिनेमाघरों का खुला होना जरूरी है, जबकि तेलुगु या तमिल को रिलीज करने के लिए केवल एक या दो राज्यों के सिनेमाघरों की जरूरत होती है। यही कारण है, कि महामारी के दौरान हिंदी फिल्में रिलीज नहीं की जा सकीं।

इसके अलावा, साउथ का बाजार मुख्य रूप से सिंगल स्क्रीन सिनेमा पर निर्भर है, जबकि हिंदी सिनेमा पिछले करीब दो दशकों से मल्टीप्लेक्स पर आधारित है। दर्शकों के एक बड़े ग्रुप के लिए एक्शन फिल्में अब हिंदी में मुश्किल से बनती हैं, जो कि सिंगल स्क्रीन की फेवरेट होती हैं। ये बात टॉलीवुड समझ चुका है यही कारण है कि 2020 और 2021 में जब-जब सिनेमा खुले, तमिल (मास्टर) और तेलुगू फिल्मों (वकील साब, उप्पेना) ने तगड़ा कारोबार किया।

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